खरगोन-बड़वानी

बड़वानी महाविद्यालय में पोषण पखवाड़ा कार्यक्रम, डॉ. प्रमोद पंडित बोले—देहदान सबसे बड़ा पुण्य कार्य

बड़वानी; पोषण पखवाड़ा पर महाविद्यालय में हुआ कार्यक्रम देहदान बहुत पुण्य का कार्य डॉक्टर प्रमोद पंडित शासकीय आदर्श महाविद्यालय बड़वानी में राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से आठवां पोषण पखवाड़ा कार्यक्रम का आयोजन किया गया महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर प्रमोद पंडित के मार्गदर्शन में आयोजित पोषण पखवाड़ा जागरूकता सत्ता के अंतर्गत पोषण और उससे होने वाले विभिन्न रोग व समस्याओं के बारे में विद्यार्थियों और संस्था के सदस्यों को अवगत कराया गया डॉक्टर प्रमोद पंडित ने इस अवसर पर कहा कि हम अपने शरीर के लिए उचित पोषण पर ध्यान केंद्रित करें समय-समय पर विभिन्न प्रकार के प्रोटीन विटामिन खनिज लवण के माध्यम से शरीर को पोषित रखें जिससे बीमारियों से बचा जा सकता है राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी प्रो मुवेल ने बताया कि आठवां पोषण पखवाड़ा जागरूकता के साथ-साथ देहदान अंगदान के लिए भी विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रश्न मंच , निबंध पोस्टर तथा शपथ भी ली गई तथा विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गई

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने कहा की देहदान हमारे समाज की प्राचीन परंपरा रही पुराने समय में शरीर को जंगल में छोड़कर पशु पक्षियों के पोषण का काम किया जाता है अर्थात व्यक्ति जीते जी परोपकार करता ही था लेकिन मरने के बाद भी उसका शरीर परोपकार करता है नदियों में मछलियों के लिए शव को बहा दिया जाता था समय के साथ अब इस व्यवस्था में परिवर्तन आया और अब मृत्यु के पहले हम अपने शरीर के विभिन्न अंगों को दान करने की शपथ ले सकते हैं जिससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में विभिन्न लोग लाभ ले सकें आंखों का दान बहुत प्रचलित है जिससे एक साथ दो लोगों के जीवन में रोशनी आ सकती अनेक बार दुर्घटनाओं में मृत्यु को प्राप्त लोगों के परिवार जनों से सहमति लेकर शरीर के विभिन्न अंगों का दान किया जा सकता है साथ ही विभिन्न मेडिकल कॉलेज में मृत शरीर के परीक्षण से विद्यार्थियों को विभिन्न स्थिति से अवगत कराने के लिए देहदान किया जाता है इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ डॉ. बी.एस. साथी प्राध्यापकों उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभारी के द्वारा किया गया।। आभार प्रो.मुवेल ने व्यक्त किया।

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