वर्षों पुरानी मांग पर शुरू हुआ विशेष अध्ययन, कोतवाल समाज अजजा वर्ग में हो सकता है शामिल, समाज में हर्ष
अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य के हस्तक्षेप के बाद राज्य शासन ने शुरू किया नृवंशविज्ञान अध्ययन

सेंधवा। कोतवाल समाज को अनुसूचित जाति वर्ग से अनुसूचित जनजाति (अजजा) वर्ग में सम्मिलित किए जाने की वर्षों पुरानी मांग अब निर्णायक दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य के हस्तक्षेप के बाद मध्यप्रदेश शासन द्वारा कोतवाल समाज के संबंध में नृवंशविज्ञान अध्ययन तथा सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति के समग्र आकलन हेतु विशेष अध्ययन प्रारंभ किया गया है। शासन की इस पहल से कोतवाल समाज में हर्ष का माहौल है।
उक्त जानकारी भाजपा प्रवक्ता सुनील अग्रवाल ने दी। अग्रवाल ने बताया कि रविवार को मध्यप्रदेश, गुजरात एवं महाराष्ट्र के पांच जिलों से आदिवासी कोतवाल समाज का प्रतिनिधि मंडल सेंधवा पहुंचा। प्रतिनिधि मंडल ने अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य से भेंट कर उनका पुष्पगुच्छ एवं पुष्पमाला से गर्मजोशी के साथ स्वागत एवं सम्मान किया।

वर्षों से उठ रही थी मांग
प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने बताया कि कोतवाल समाज को वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग में बताया जाता है, जबकि समाज की वर्षों से यह मांग रही है कि कोतवाल समाज की वास्तविक सामाजिक एवं आदिवासी पहचान के आधार पर उसे अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल किया जाए। इस मांग को लेकर समाज द्वारा लंबे समय से शासन-प्रशासन को पत्राचार किए जाते रहे हैं तथा विभिन्न स्तरों पर प्रयास भी किए गए, लेकिन लंबे समय तक इस दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

प्रतिनिधियों ने बताया कि समाज की मांग को लेकर पूर्व में वे अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य से मिले थे। उन्होंने समाज की बात को गंभीरता से सुनते हुए इस मामले में आवश्यक पहल का भरोसा दिलाया था।
आर्य के प्रयासों से शासन ने शुरू की प्रक्रिया
प्रतिनिधि मंडल के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य द्वारा राज्य शासन से पत्राचार किए जाने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इसके तहत कोतवाल समाज की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, परंपराओं, रहन-सहन तथा आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति का समग्र आकलन करने के लिए विशेष अध्ययन प्रारंभ किया गया है।
इस अध्ययन में नृवंशविज्ञान संबंधी पहलुओं के साथ समाज की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि लंबे समय से लंबित मांग पर शासन द्वारा अध्ययन प्रारंभ किया जाना समाज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
तीन राज्यों के प्रतिनिधियों ने किया सम्मान
राष्ट्रीय अध्यक्ष आर्य के प्रयासों से उत्साहित कोतवाल समाज के प्रतिनिधियों ने उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पहल से समाज की वर्षों पुरानी मांग को नई दिशा मिली है। इसी भावना के साथ मध्यप्रदेश सहित गुजरात एवं महाराष्ट्र के पांच जिलों से समाज के प्रतिनिधि सेंधवा पहुंचे और आर्य का सम्मान किया।
प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि समाज को उम्मीद है कि अध्ययन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद कोतवाल समाज की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और उसे अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल किए जाने की दिशा में सकारात्मक निर्णय होगा।
इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने समाज की मांग को गंभीरता से लेकर शासन स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया, जिसके परिणामस्वरूप वर्षों से लंबित विषय पर अब सरकारी स्तर पर विशेष अध्ययन शुरू हो सका है। इससे कोतवाल समाज के लोगों में नई उम्मीद और उत्साह का संचार हुआ है।



