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निमाड़ में वीरपोस पर्व आज: भाई-बहन के स्नेह और मायके के बुलावे की अनूठी परंपरा जीवंत

रक्षाबंधन से पहले भाई पहुंचाते हैं बहनों को मायके आने का निमंत्रण, लोकसंस्कृति में विशेष महत्व

जनोदय पंच। निमाड़ की पारंपरिक संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा वीरपोस पर्व रविवार को मनाया जाएगा। इस पर्व पर भाई अपनी बहन के घर पहुंचकर रक्षाबंधन पर मायके आने का निमंत्रण देते हैं। यह परंपरा पारिवारिक स्नेह और अपनत्व का प्रतीक मानी जाती है।


भाई लेकर पहुंचते हैं शगुन सामग्री

निमाड़। वीरपोस (ईरपोस) पर्व पर भाई अपनी बहन के घर जाकर उसे रक्षाबंधन के अवसर पर मायके आने का ससम्मान निमंत्रण देता है। भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार गेहूं, चावल, गुड़, घी, कपड़े, नारियल, मिठाई सहित अन्य सामग्री शगुन के रूप में लेकर बहन के घर पहुंचता है।

इस वर्ष यह पारंपरिक पर्व 23 अगस्त 2026, रविवार को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर निमाड़ अंचल में पारंपरिक रीति-रिवाजों और पारिवारिक भावनाओं से जुड़ा उत्साह देखने को मिलेगा।


बहन करती है भाई का आत्मीय स्वागत

वीरपोस की परंपरा के अनुसार बहन भी भाई के आने की प्रतीक्षा करती है। भाई के घर पहुंचने पर बहन तिलक लगाकर और आरती उतारकर उसका स्वागत करती है। इसके बाद बहन भाई के सुख, समृद्धि और दीर्घायु की मंगलकामना करती है।

परंपरा के अनुसार बहन अपने भाई को स्नेहपूर्वक भोजन करवाती है। इस दौरान भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता और पारिवारिक जुड़ाव दिखाई देता है।


रक्षाबंधन के मायके बुलावे की परंपरा

वीरपोस पर्व की सबसे विशेष परंपरा रक्षाबंधन पर बहन को मायके आने का निमंत्रण देना है। भाई का यह बुलावा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि बहन के प्रति मायके के प्रेम, सम्मान और अपनत्व का प्रतीक माना जाता है।

यह परंपरा निमाड़ की सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था में भाई-बहन के रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम बनी हुई है।


लोकसंस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा

निमाड़ की लोकसंस्कृति में वीरपोस पर्व भाई-बहन के प्रेम और भावनात्मक संबंधों को दर्शाता है। आधुनिक समय में कई पारंपरिक रीति-रिवाजों में बदलाव आने के बावजूद वीरपोस जैसी लोकपरंपराएं क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

 

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