सेंधवा में छठी बिरसा कांवड़ यात्रा शुरू, 200 से अधिक कांवड़िए कामोद के गुप्तेश्वर महादेव पहुंचेंगे
धनोरा से निकली यात्रा, करीब 30 किलोमीटर पैदल चलकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे श्रद्धालु

जनोदय पंच। सेंधवा में रविवार को छठी बिरसा कांवड़ यात्रा धनोरा से शुरू हुई। यात्रा में 200 से अधिक कांवड़ यात्री शामिल हुए। श्रद्धालु करीब 30 किलोमीटर पैदल चलकर कामोद के गुप्तेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे और कांवड़ में लाए जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
धनेश्वर महादेव मंदिर में पूजन के बाद रवाना हुई यात्रा
सेंधवा। जनजाति समाज की धार्मिक आस्था, संस्कृति और रीति-रिवाजों के संरक्षण का संदेश लेकर रविवार को छठे वर्ष बिरसा कांवड़ यात्रा निकाली गई। भाजपा अजजा मोर्चा के जिला अध्यक्ष डॉ. रेलाश सेनानी के नेतृत्व में निकली यात्रा की शुरुआत सेंधवा ब्लॉक के धनोरा स्थित धनेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक-पूजन के बाद दोपहर करीब 11.30 बजे हुई।
यात्रा में 200 से अधिक कांवड़ यात्री शामिल हुए। बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्गों तक जनजाति समाज के लोग यात्रा में शामिल रहे। यात्रा के दौरान डीजे पर शिव भजनों के बीच श्रद्धालु उत्साहपूर्वक आगे बढ़े।

30 किलोमीटर पैदल चलकर करेंगे जलाभिषेक
कांवड़ यात्री करीब 30 किलोमीटर पैदल चलकर सतपुड़ा की पहाड़ी पर स्थित कामोद के गुप्तेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। यहां कांवड़ में लाए गए जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, यात्रा के शाम करीब 5 बजे गुप्तेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने की उम्मीद है।
यात्रा में शिवपंथ के गुरु वनसिंग बाबा और गुरु माता सुमली बाई भी मौजूद रहीं। रास्ते में आने वाले विभिन्न गांवों से भी श्रद्धालुओं के यात्रा में शामिल होने की जानकारी दी गई है।
इन गांवों से होकर कामोद पहुंचेगी यात्रा
बिरसा कांवड़ यात्रा धनोरा से रवाना होकर चारदड, कुमठाना, लंगड़ीमोहदी, चिथरई, कोटकीराडी, चाचरिया, खुर्माबाद और रामगढ़ी होते हुए कामोद पहुंचेगी। यात्रा के दौरान विशालकाय हनुमान जी की प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
धर्मांतरण रोकने और संस्कृति संरक्षण का संदेश
यात्रा संयोजक डॉ. रेलाश सेनानी ने बताया कि बिरसा कांवड़ यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र में हो रहे धर्मांतरण को रोकना और जनजाति समाज की संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण का संदेश देना है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अच्छी बारिश और खुशहाली की कामना भी की जाएगी।
डॉ. रेलाश सेनानी ने बताया कि जनजाति समाज के क्रांतिकारी योद्धा बिरसा मुंडा भगवान शिव के उपासक थे। इसी भाव को ध्यान में रखते हुए यात्रा का नाम बिरसा कांवड़ यात्रा रखा गया है। आयोजकों के अनुसार, कांवड़ यात्रा के माध्यम से समाज को अपनी रीति-रिवाजों, धार्मिक परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।



