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“द क्ले हॉर्स”: अंगदान, भावनाओं और रहस्य से बुनी एक संवेदनशील कहानी

बालिका संरक्षण, जेनेटिक मेमोरी और मानवीय रिश्तों पर आधारित लघु फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बटोरी सराहना

जनोदय पंच। इंदौर। “द क्ले हॉर्स” सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह एक भावनात्मक यात्रा है जो आधुनिक जीवन के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों में से एक को उठाती है—बालिका को बचाना और उसके लिए अंग प्रत्यारोपण का महत्व। क्या मौत के बाद भी कोई बंधन जिंदा रह सकता है….? यह बात डॉ परविंदरसिंह लुबाना की द्वितीय लघु फिल्म में दर्शाया गया है । यह फिल्म 13 अप्रैल को यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुई । “द क्ले हॉर्स” (मिट्टी का घोड़ा) नाम से यह लघु फिल्म में दर्शाया है कि कैसे जैनेटिक मेमोरी उम्मीद की एक नई किरण बनकर जीवन को आगे बढ़ाने का रास्ता दिखाती है । फिल्म में अंगदान से जुड़ी हुई प्रेरणा दायक फिल्म में सेंधवा के डॉ परविंदरसिंह लुबाना ने भी अभिनय किया है । यह उनकी दूसरी लघु फिल्म है । इसके पूर्व में सारी मां ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूममचा कर 100 से अधिक अवार्ड जीते थे । एल्डरमैन सुनील अग्रवाल ने बताया कि “द क्ले हॉर्स” शॉर्ट फिल्म एक पुरानी कल्पना पर आधारित है, 19 मिनट की फिल्म आज यह एक वैज्ञानिक सत्य के रूप में सामने आ चुकी है (जिसे कई अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित किया गया है) — अंग प्रत्यारोपण के माध्यम से जेनेटिक मेमोरी ट्रांसफर।
एक शांत फैमिली गेटअवे के रूप में शुरू हुई कहानी जल्द ही एक असहज अनुभव में बदल जाती है, जब एक अनजान मौजूदगी धीरे-धीरे साए में मंडराने लगती है। एक रहस्यमय आदमी—खामोश और दूर—परिवार के भीतर डर और शंका पैदा कर देता है, और उनका सुकून भरा ठिकाना तनाव और भावनाओं से भरे संघर्ष में बदल जाता है। लेकिन इस सस्पेंस भरे माहौल के केंद्र में छिपी है एक बेहद भावुक कहानी। बढ़ते डर के बीच, एक छोटी बच्ची उसी आदमी से एक अनोखा रिश्ता बना लेती है जिससे सब डरते हैं। उसकी मासूमियत के जरिए एक अलग सच्चाई सामने आने लगती है—जो गलतफहमियों, दर्द और खामोश पीड़ा की परतों को उजागर करती है। लगातार बरसती बारिश, जो गांव के साथ-साथ अंदरूनी उथल-पुथल को भी दर्शाती है, इस कहानी को करुणा, उपचार और मानवीय जुड़ाव की एक शक्तिशाली यात्रा में बदल देती है।“द क्ले हॉर्स” एक दिल को छू लेने वाली कहानी है, जो हमारी सोच को चुनौती देती है—यह याद दिलाती है कि कभी-कभी जिससे हम सबसे ज्यादा डरते हैं, वह बस वही होता है जिसे हम समझ नहीं पाते हैं।
यह फिल्म जीवन के भविष्य को दर्शाती है, विशेष रूप से अंगदान के संदर्भ में—खासतौर पर बालिका के अंग प्रत्यारोपण और बेटी बचाओ के संदेश के साथ है। अग्रवाल ने बताया कि
इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में व्यापक सराहना और सम्मान मिला है। प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार हैं:
* एपेक्स फिल्म अवॉर्ड्स, इंग्लैंड में नामांकन
* विजेता – बेस्ट डायरेक्टर (शॉर्ट फिल्म), कान्स वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल, फ्रांस
* विजेता – बेस्ट नैरेटिव शॉर्ट फिल्म, कान्स वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल, फ्रांस
* विजेता – बेस्ट इंडियन फिल्म, कान्स वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल, फ्रांस
* विजेता – बेस्ट फिक्शन शॉर्ट, अमेरिकन गोल्डन पिक्चर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल
* अवॉर्ड ऑफ डिस्टिंक्शन, कनाडा शॉर्ट्स फिल्म फेस्टिवल, वैंकूवर
* यूएसए, पेरिस, मलेशिया और पुणे के विभिन्न फेस्टिवल्स में बेस्ट शॉर्ट फिल्म अवॉर्ड्स
लेखन एवं निर्देशन: विशाल कुमार पाटिल
निर्माता: बलविंदर सिंह (USA), डॉ. परविंदर सिंह लुबाना
प्रस्तुतकर्ता: लिटिल रॉक पिक्चर कंपनी, USA
निर्माण: लिटिल रॉक पिक्चर प्राइवेट लिमिटेड, इंडिया/USA
“द क्ले हॉर्स” सिर्फ एक फिल्म नहीं है…यह एक ऐसा अनुभव है जो दिल और दिमाग में लंबे समय तक बना रहता है। यूट्यूब पर https://youtu.be/56Tgj15woho आप देख सकते हैं ।

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