सेंधवा में श्री शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ, शोभायात्रा और कलशयात्रा के साथ श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से किया स्वागत
सत्यनारायण मंदिर से कथा स्थल तक निकली शोभायात्रा, कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज ने दिए आध्यात्मिक संदेश

रमन बोरखड़े। सेंधवा; नगर की कृषि उपज मंडी स्थित शेड में गौरीशंकर कथा आयोजन समिति के तत्वावधान में शनिवार से श्री शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व भव्य शोभायात्रा एवं कलशयात्रा निकाली गई। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया तथा कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज ने शिव भक्ति और धर्म के महत्व पर प्रवचन दिए।

शोभायात्रा के साथ हुआ कथा का शुभारंभ
सेंधवा नगर की कृषि उपज मंडी स्थित शेड में गौरीशंकर कथा आयोजन समिति के तत्वावधान में शनिवार से श्री शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। कथा प्रारंभ होने से पहले श्री सत्यनारायण मंदिर से गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा एवं कलशयात्रा निकाली गई। यात्रा श्याम बाजार, राम बाजार और किला परिसर से होकर कथा स्थल पहुंची। इस दौरान श्रद्धालु भजनों और गरबा पर झूमते हुए शामिल हुए। मंदिर परिसर में अग्रवाल समाज ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। श्री सत्यनारायण मंदिर में विधिवत श्री शिवमहापुराण का पूजन किया गया। श्रद्धालु सिर पर शिवमहापुराण की प्रति लेकर शोभायात्रा में शामिल हुए। विशेष रथ पर कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज विराजित रहे। श्याम बाजार में अनेक परिवारों ने स्वागत किया, जबकि राम बाजार में पालीवाल समाज ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।



शिव भक्ति और निर्मल मन का महत्व बताया
कथा के दौरान कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज ने कहा कि जो श्रद्धालु भगवान शिव की महापुराण कथा का श्रवण करता है, उसे शिव यमलोक में नहीं रहने देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव दयालु हैं और उनकी भक्ति से महापापों का भी नाश हो जाता है। कथा में उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने कहा है कि जो व्यक्ति उनका ध्यान करते हुए शरीर त्यागता है, उसका कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि भगवान को कपट, छल और छिद्र पसंद नहीं हैं तथा निर्मल मन से की गई भक्ति ही उन्हें प्रिय होती है।



विपरीत समय में होती है धैर्य और मित्र की पहचान
प्रवचन के दौरान जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज ने कहा कि “धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी” का अर्थ है कि धैर्य, धर्म, मित्र और नारी की वास्तविक परीक्षा विपत्ति के समय होती है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना आवश्यक है तथा सच्चे मित्र की पहचान भी कठिन समय में ही होती है। यदि कोई बुरे समय में साथ छोड़ दे तो वह सच्चा मित्र नहीं हो सकता।


धर्म के आचरण पर दिया जोर
कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज ने कहा कि जो धर्म का त्याग करते हैं, वे मूर्ख हैं। यदि जीवन में सुख और शांति चाहिए तो धर्म का आश्रय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म वहां भी प्राणी की रक्षा करता है, जहां कोई अन्य रक्षा नहीं कर सकता। प्रत्येक पुराण और शास्त्र पाप से दूर रहने की शिक्षा देते हैं। शिवपुराण का श्रवण और अध्ययन धर्म के प्रति जागरूकता उत्पन्न करता है तथा धर्माचरण का महत्व समझाता है।





