बड़वानी में युवक की मौत पर बवाल, जिला अस्पताल पर लापरवाही का आरोप; थाने में जयस का प्रदर्शन
मृतक के परिजन और जयस कार्यकर्ताओं ने गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग उठाई, कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया

जनोदय पंच। बड़वानी जिला अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत के बाद परिजनों और जयस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली थाना परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की, जबकि प्रशासन ने पूरे मामले की जांच का आश्वासन दिया।
अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप, थाने में प्रदर्शन
बड़वानी जिला अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जयस (जय आदिवासी युवा शक्ति) के कार्यकर्ताओं और मृतक के परिजनों ने शुक्रवार को कोतवाली थाना परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग की। काफी देर तक चले हंगामे के बाद थाना प्रभारी बलजीत सिंह बिसेन और सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना की समझाइश पर मामला शांत हुआ।

ब्लड नहीं मिलने और रिकॉर्ड में नाम की त्रुटि का आरोप
जयस के प्रदेश प्रवक्ता संदीप नरगावे ने बताया कि नंदगांव निवासी शिवराम (पिता भिक्या) की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 29 जुलाई को जांच में उनका हीमोग्लोबिन 5.3 ग्राम पाया गया, जिसके बाद तत्काल ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि परिजनों ने रक्तदान का प्रयास किया, लेकिन ओटीपी नहीं आने और अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर प्रक्रिया टाल दी गई। बाद में एक डोनर द्वारा रक्तदान किए जाने के बावजूद रिकॉर्ड में मरीज का नाम ‘शिवराम’ के स्थान पर ‘शिवम’ दर्ज होने से ब्लड जारी नहीं हो सका। आरोप है कि इसी दौरान उपचार में देरी हुई और 30 जुलाई की शाम शिवराम की मौत हो गई।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
जयस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन की हीलाहवाली के कारण युवक की जान गई। संगठन ने जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। पुलिस द्वारा जांच की बात कहने पर संगठन ने कहा कि मामला स्पष्ट है और बिना देरी के कार्रवाई की जानी चाहिए।

कलेक्टर ने जांच के बाद कार्रवाई का दिया आश्वासन
बड़वानी कलेक्टर जयंती सिंह ने बताया कि मामला प्रारंभिक रूप से फूड पॉइजनिंग और कम हीमोग्लोबिन से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि ब्लड चढ़ाने में देरी किन कारणों से हुई, इसकी विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। यदि अस्पताल की व्यवस्था या कर्मचारियों के स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो निष्पक्ष जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।



