सेंधवा: चंद्र ग्रहण के साये में होलिका दहन, 2 मार्च को जलेगी होली
फाल्गुन पूर्णिमा पर ग्रहण योग के कारण मतभेद, नगर के पंडितों और समितियों ने पंचांग व धर्मसिंधु के आधार पर लिया निर्णय

जनोदय पंच।फाल्गुन पूर्णिमा पर इस वर्ष चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन की तिथि को लेकर मतभेद रहे। सेंधवा में स्थानीय विद्वान पंडितों और होलिका समितियों ने धर्मशास्त्रों व पंचांग के आधार पर निर्णय लेते हुए 2 मार्च को होलिका दहन करने का फैसला किया है।
तिथि को लेकर बना असमंजस
फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण की स्थिति बनने से देशभर में 2 मार्च और 3 मार्च को लेकर अलग-अलग मत सामने आए। कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से भद्रा प्रारंभ होकर 3 मार्च की सुबह 5:32 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। 3 मार्च को शाम 6:22 बजे से 8:50 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त बताया गया।
धर्मसिंधु और पंचांग के आधार पर निर्णय
नगर के विद्वान पंडितों ने शास्त्रसम्मत विवेचना प्रस्तुत की। पंडित सुदर्शन शर्मा ने बताया कि राजज्योतिष भवानी शंकर शर्मा के पंचांग (पृष्ठ 26) में संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी (14) के दिन 2 मार्च को प्रदोषकाल में पूर्णिमा की व्याप्ति तथा संपूर्ण रात्रि में भद्रा का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च को पूर्णिमा सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है और उसी दिन ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण का योग बन रहा है। धर्मग्रंथ धर्मसिंधु के अनुसार ऐसी स्थिति में होलिका दहन पूर्व दिवस में करना श्रेयस्कर माना गया है। पंडित ब्रजमोहन शास्त्री और पंडित राधा माधव शर्मा ने भी 2 मार्च के निर्णय पर सहमति दी।

धुलंडी पर स्पष्टता
पंडित सुदर्शन शर्मा ने स्पष्ट किया कि होलिका दहन के अगले दिन धुलंडी मनाई जाती है और इसका ग्रहण से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। 4 मार्च को प्रातः 4:49 बजे तक पड़वा तिथि होने से धुलंडी 4 मार्च को मनाई जा सकती है। कुछ विद्वानों के अनुसार 3 मार्च को ग्रहण होने से धुलंडी 4 मार्च को मनाना उचित रहेगा।
समितियों ने घोषित किया कार्यक्रम
मोतीबाग चौक होलिका दहन के संचालक सुनील अग्रवाल ने बताया कि 2 मार्च को शाम 7:30 बजे विधि-विधान से होलिका दहन किया जाएगा। रामकटोरा क्षेत्र में भी 2 मार्च को ही होली प्रज्ज्वलित की जाएगी। अटल चौराहा मित्र मंडल के अक्षय श्रीवास ने बताया कि अटल चौराहे पर 2 मार्च को होलिका दहन होगा और भव्य श्रृंगाल किया जाएगा। धार्मिक शास्त्रों, पंचांग और ग्रहण की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सेंधवा नगर में 2 मार्च को श्रद्धा और आस्था के साथ होलिका दहन आयोजित किया जाएगा।



