सेंधवा

सेंधवा: बाबदाड़ में ऐतिहासिक आख़िरी भोंगर्या हाट, 15 हजार से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी

होली पूर्व आयोजित अंतिम भोंगर्या हाट में आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक नृत्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवंत तस्वीर देखने को मिली

जनोदय पंच। सेंधवा अंचल के ग्राम बाबदाड़ में आयोजित ऐतिहासिक आख़िरी भोंगर्या हाट में 15 हजार से अधिक ग्रामीणों की उपस्थिति रही। होली पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी हुई। आदिवासी संस्कृति की झलक के बीच सिलदार सोलंकी ने आयोजन को सामाजिक एकता का प्रतीक बताया।


ऐतिहासिक हाट में उमड़ी भीड़

सेंधवा अंचल के ग्राम बाबदाड़ में परंपरागत और ऐतिहासिक भोंगर्या हाट का आख़िरी आयोजन भव्य और उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। आसपास के गांवों से लगभग 15 हजार से अधिक ग्रामीणजन बड़ी संख्या में पहुंचे। हाट में होली पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी की गई। दिनभर बाजार क्षेत्र में चहल-पहल और उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक

भोंगर्या हाट में आदिवासी संस्कृति की जीवंत छवि दिखाई दी। ढोल, मादल और बांसुरी की मधुर धुनों पर युवक-युवतियां, बुजुर्ग और किसान भाई-बहन पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते नजर आए। पूरा वातावरण रंगों और उल्लास से सराबोर रहा।

जनप्रतिनिधि हुए शामिल

बाबदड़ भगोरिया हाट में कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए।इस अवसर पर किसान कांग्रेस जिला बड़वानी के जिला अध्यक्ष सिलदार सोलंकी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सिलदार सोलंकी ने हाट परिसर का भ्रमण कर ग्रामीणजनों, किसानों और व्यापारियों से मुलाकात की। उन्होंने स्थानीय दुकानदारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि भोंगर्या हाट केवल एक बाजार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और परंपराओं का प्रतीक है। यह आयोजन आदिवासी समाज की पहचान और गौरव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और समाज में भाईचारा सुदृढ़ होता है।

पारंपरिक नृत्य में सहभागिता

सिलदार सोलंकी ने ढोल-मादल की थाप पर ग्रामीणों के साथ पारंपरिक नृत्य में सहभागिता की, जिससे जनसमूह में विशेष उत्साह दिखाई दिया। ग्रामीणों ने स्वागत करते हुए समस्त क्षेत्रवासियों को होली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं दीं और समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखने का संदेश दिया।बाबदड़ का यह आख़िरी भोंगर्या हाट सांस्कृतिक एकता, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का उदाहरण बनकर सम्पन्न हुआ।

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