आदिवासी महिलाओं के शोषण और भूमि हस्तांतरण का मुद्दा राज्यसभा में उठा, सख्त कार्रवाई की मांग
राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने शून्यकाल में उठाया विषय, केंद्र से व्यापक जांच और कानूनी सख्ती की अपील

जनोदय पंच। बड़वानी। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने आदिवासी महिलाओं के साथ कथित रूप से हो रही धोखाधड़ी, उनके शोषण तथा आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण के गंभीर मुद्दे को सदन में उठाया और केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया।
अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि कुछ गैर-आदिवासी व्यक्तियों द्वारा आदिवासी महिलाओं से विवाह के नाम पर छल किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं, जिनका उद्देश्य उनकी भूमि पर अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने उल्लेख किया कि विवाह के उपरांत संबंधित महिलाओं के नाम पर अत्यंत कम मूल्य पर भूमि क्रय की जाती है और बाद में विभिन्न परिस्थितियों में उस संपत्ति को पैतृक स्वरूप देकर उच्च मूल्य पर विक्रय किया जाता है।
डॉ. सोलंकी ने इस प्रवृत्ति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि इससे न केवल आदिवासी महिलाओं का शोषण हो रहा है, बल्कि दीर्घकाल में आदिवासी समुदाय की भूमि गैर-आदिवासी तत्वों के हाथों में स्थानांतरित होने का गंभीर खतरा भी उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लिए भूमि केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और जीवन पद्धति का आधार है।
उन्होंने यह भी अवगत कराया कि मध्य प्रदेश सहित कुछ क्षेत्रों में अतीत में आदिवासी भूमि के हस्तांतरण से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिनकी समुचित जांच आवश्यक है।
इस संदर्भ में डॉ. सोलंकी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ऐसे मामलों की व्यापक एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए तथा आवश्यकतानुसार विधिक प्रावधानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा एवं उनकी भूमि के संरक्षण के लिए ठोस कानूनी उपाय किए जाने, संदिग्ध परिस्थितियों में हुए भूमि हस्तांतरणों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा राज्य सरकारों को इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी हेतु दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा आदिवासी समुदाय को प्रदान किए गए विशेष संरक्षण के मद्देनजर उनके अधिकारों की रक्षा करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अंत में उन्होंने केंद्र सरकार से अपेक्षा व्यक्त की कि आदिवासी समाज की भूमि, उनके अधिकारों और विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम शीघ्र उठाए जाएंगे, जिससे इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।



