मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी तेज, रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति गठित
सरकार ने विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत कानूनों के अध्ययन के लिए 60 दिन में रिपोर्ट देने का लक्ष्य तय किया

मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। छह सदस्यीय यह समिति विभिन्न निजी कानूनों का अध्ययन कर 60 दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने इस दिशा में एक हाईपावर कमेटी का गठन किया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत यह समिति प्रदेश में यूसीसी लागू करने की संभावनाओं पर काम करेगी और एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए अध्ययन करेगी।
समिति की संरचना
समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रसाद देसाई करेंगी। इसके अलावा समिति में पांच अन्य सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनमें सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया शामिल हैं। यह छह सदस्यीय समिति विभिन्न पहलुओं पर विचार कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
अध्ययन के प्रमुख विषय
यह समिति प्रदेश में विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे निजी कानूनों का अध्ययन करेगी। इन सभी विषयों के आधार पर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा। समिति का उद्देश्य विभिन्न कानूनों में समानता लाना और एक स्पष्ट विधिक व्यवस्था विकसित करना है।
समयसीमा और कार्यप्रणाली
सरकार द्वारा गठित यह समिति 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। अध्ययन के दौरान विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यवहारिक सुझाव दिए जाएंगे, जिससे भविष्य में लागू किए जाने वाले कानून के लिए स्पष्ट दिशा मिल सके।
पूर्व अनुभव
उल्लेखनीय है कि रंजना प्रसाद देसाई ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति का भी नेतृत्व किया था। उनके अनुभव के आधार पर मध्य प्रदेश में भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।



