मध्य प्रदेश में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की सौ साल बाद वापसी हुई है। काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए भैंसों के जोड़े कान्हा टाइगर रिजर्व पहुंच चुके हैं, जिन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
भोपाल में चीता प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब मध्य प्रदेश में अन्य विलुप्त वन्यजीवों को दोबारा बसाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत असम से बाघों के बदले जंगली भैंसे, किंग कोबरा और गेंडे लाए जाएंगे। इस योजना के पहले चरण में काजीरंगा नेशनल पार्क से जंगली भैंसों के जोड़े कान्हा टाइगर रिजर्व पहुंच गए हैं।
कान्हा में ऐतिहासिक शुरुआत
मुख्यमंत्री मोहन यादव बालाघाट जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में इन जंगली भैंसों को घास के मैदान में रिलीज करेंगे। देर रात विशेष वाहन के जरिए भैंसों के दो जोड़े कान्हा लाए गए। इन्हें विशेषज्ञों की मौजूदगी में प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
परियोजना का उद्देश्य
असम के जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश में इनकी स्वस्थ आबादी विकसित करना है, जिसे तकनीकी भाषा में फाउंडर पॉपुलेशन कहा जाता है। इस प्रोजेक्ट के तहत चरणबद्ध तरीके से कुल 50 जंगली भैंसे काजीरंगा से मध्य प्रदेश लाए जाएंगे। पूरी यात्रा के दौरान विशेषज्ञों की टीम लगातार निगरानी करती रही।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जंगली भैंसों की वापसी पर कहा कि, “आज एमपी एक और उपलब्धि हासिल कर रहा है। लगभग एक शताब्दी पहले विलुप्त हो चुकी जंगली भैंस की प्रजाति कान्हा टाइगर रिजर्व में पुनर्स्थापन किया जा रहा है। असम के काजीरंगा से कान्हा तक का यह सफर हमारी जैव विविधता को नई शक्ति प्रदान करेगा।”