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आपकी बात; रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका और मीनाक्षी नटराजन की सजगता पर उठते सवाल

रंजन श्रीवास्तव/ भोपाल
ranjansrivastava1@gmail.com
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5 जनवरी, 1965 को जन्मे दिल्ली के निवासी अरविंद शर्मा की भूमिका आज चर्चा में है. दिल्ली विश्वविद्यालय से विज्ञान और विधि स्नातक तथा हिमाचल विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर शर्मा मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव हैं. इसी कारण वे मध्य प्रदेश से राज्य सभा की तीन सीटों के लिए हो रहे चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर भी हैं.
विधानसभा के वेब पोर्टल पर उनके प्रोफाइल के अनुसार उनके पास लोकसभा सचिवालय में अवर सचिव, उप सचिव तथा अन्य पदों पर कार्य करते हुए लगभग 26 वर्षों का अनुभव था.
शर्मा जनवरी 2025 में लोकसभा सचिवालय से सेवानिवृत्त होते.
पर उसके पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा मध्य प्रदेश विधान सभा के वर्तमान अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के कार्यकाल के दौरान शर्मा मार्च 2024 में विधानसभा में सचिव पद पर प्रतिनियुक्ति पर आए. 19 जनवरी, 2025 में उनकी सेवा का संविलियन विधानसभा की सेवा में कर दिया गया तथा उनका पदोन्नयन प्रमुख सचिव पद पर 1 अक्टूबर, 2025 को किया गया.

चूंकि मध्य प्रदेश में सरकारी सेवकों और विधानसभा के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, अतः वे जनवरी 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे, अगर उनको सेवा में विस्तार नहीं मिलता है तो. विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव ए.पी. सिंह को मार्च 2023 में सेवानिवृत्ति के पश्चात कई बार सेवा विस्तार मिलता रहा, जो सितंबर 2025 तक चला.
अरविंद शर्मा की भूमिका इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनके द्वारा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया क्योंकि भाजपा के उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल और महेश केवट तथा प्रदेश भाजपा के महामंत्री राहुल कोठारी के द्वारा की गई शिकायत के अनुसार मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म में कई गंभीर त्रुटियां थीं तथा उन्होंने अपने विरुद्ध एक कथित अपराध में आरोपी होने के तथ्य को छिपा लिया था तथा उसका उल्लेख नहीं किया.
चूंकि अरविंद शर्मा स्वयं विधि स्नातक हैं और विधानसभा में अपनी प्रतिनियुक्ति के पूर्व लंबे समय तक लोकसभा सचिवालय में सेवाएं दे चुके हैं, अतः यह नहीं माना जा सकता कि उन्हें कानून का ज्ञान नहीं होगा.
पर राज्यसभा सदस्य तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी का यह बयान है कि, “यह संभव ही नहीं कि रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और निष्पक्ष रुख अपनाया हो. कानून में ऐसा कोई रास्ता नहीं था जिससे वे नामांकन खारिज कर सकते थे.”
अभिषेक मनु सिंघवी के बयान के अनुसार, “मीनाक्षी नटराजन जी के नामांकन पत्र को अद्भुत और आश्चर्यजनक तरीके से खारिज कर दिया गया, जो कि स्पष्ट रूप से और घोर रूप से अवैध है, क्योंकि कानून की नजर में नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला मौजूद ही नहीं है. उनके लिए खुलासा करने वाला कोई क्रिमिनल केस नहीं था.”
अभिषेक मनु सिंघवी के बयान से पहले मध्य प्रदेश के वरिष्ठ वकील अजय गुप्ता, जो कि आपराधिक मामलों में वकील के तौर पर एक विशेषज्ञ माने जाते हैं, उन्होंने प्रदेश कांग्रेस समिति में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से यहां तक दावा किया कि अगर मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ इस वक्त कोई आपराधिक मामला बनता हो, जिसका खुलासा उनके द्वारा नामांकन फॉर्म में करना जरूरी है, तो वे अपनी 32 साल की वकालत की प्रैक्टिस छोड़ने को तैयार हैं.
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने, जिसमें स्वयं मीनाक्षी नटराजन भी थीं, ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के सामने अपने पक्ष को रखा तथा उनसे न्याय की उम्मीद की क्योंकि अभी भी नामांकन की पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं हुई है. उम्मीदवारी वापस करने की अंतिम तिथि 11 जून है.
अगर चुनाव आयोग इस मामले में कोई निर्णय नहीं लेता है या उनका निर्णय नटराजन के विरुद्ध जाता है, तो नटराजन के पास न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. न्यायालय ही यह निर्णय लेगा कि रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय वैध था या अवैध.
जहां तक 52 वर्षीया मीनाक्षी नटराजन का मामला है, वे स्वयं एक अधिवक्ता हैं, लोकसभा में सांसद रह चुकी हैं तथा एक अन्य बार भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं.
अतः यह नहीं कहा जा सकता कि उनके पास नामांकन फॉर्म भरने जैसे बुनियादी ज्ञान की कमी होगी.
अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि, “किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई भी व्यक्ति प्राइवेट कंप्लेंट दायर कर सकता है, लेकिन जब तक मजिस्ट्रेट या संबंधित जज कॉग्निजेंस (अभिज्ञान) नहीं ले लेता, तब तक कोई आपराधिक मामला अस्तित्व में नहीं आता.”
उनका यह कहना है कि नटराजन के मामले में केवल कोर्ट द्वारा प्राइवेट कंप्लेंट पर एक नोटिस जारी किया गया था. उस समय कोर्ट ने अभी कॉग्निजेंस नहीं लिया था. कॉग्निजेंस लेने का मुद्दा तो अभी उनकी सुनवाई के बाद तय होना बाकी है.
पर कांग्रेस के एक खेमे में मीनाक्षी नटराजन की भूमिका को लेकर असंतोष है.
इस खेमे का यह मानना है कि जब कोर्ट नटराजन को नोटिस भेज चुका था, नटराजन उस नोटिस का संज्ञान लेकर जवाब दे चुकी थीं और उनको पता था कि भाजपा इस चुनाव में मध्य प्रदेश की तीसरी सीट को लेने के लिए साम, दाम, दंड, भेद हर पैंतरे को आजमाएगी, तो उन्हें इस परिवाद का अपने नामांकन फॉर्म में उल्लेख करने में क्या दिक्कत थी? क्योंकि नटराजन का नामिनेशन फॉर्म होने के कारण भाजपा को मध्य प्रदेश से राज्य सभा की दो के अतिरिक्त तीसरी सीट मिलना भी तय है जो कि सामान्य परिस्थितियों में कांग्रेस की होती.

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