सेंधवा में भागवत कथा के समापन पर अनूठी पहल, रक्तदान के साथ देहदान-अंगदान के संकल्प
पूर्णाहुति एवं भंडारे के साथ संपन्न हुई कथा, देहदान, अंगदान और नेत्रदान के लिए भी भरे गए संकल्प पत्र।

जनोदय पंच। सेंधवा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा का समापन पूर्णाहुति एवं भंडारे के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन 45 लोगों ने रक्तदान किया, जबकि 2 लोगों ने देहदान, 5 लोगों ने अंगदान और 20 लोगों ने नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र भरकर मानव सेवा का संदेश दिया।
सेंधवा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा का समापन भंडारे एवं पूर्णाहुति के साथ हुआ। व्यासपीठ से स्वामी प्रेमानंदनदास जी ने सातवें एवं अंतिम दिन अधिकमास में किए गए दान, जप और पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस अवधि में किए गए सत्कर्मों का फल सामान्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। दान के महत्व को समझते हुए 45 लोगों ने रक्तदान किया। इस अवसर पर मा राशी लालका एवं बेटी यशा लालका, मोहित जोशी, आयुषी जोशी, कीर्ति महेश जोशी, अश्विन गोयल एवं उमा गोयल, दिलीप विश्वकर्मा एवं आरती विश्वकर्मा ने जोड़े के रूप में रक्तदान किया। मुंबई से कथा श्रवण करने आए गोवर्धन वर्मा ने भी रक्तदान किया। 20 वर्षीय आयुषी जोशी ने पहली बार रक्तदान किया।

देहदान, अंगदान और नेत्रदान के लिए लिए संकल्प
कार्यक्रम में 2 लोगों ने देहदान, 5 लोगों ने अंगदान तथा 20 लोगों ने नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र भरे। नेत्रदानी अजय जैन के परिवारजनों विजय जैन, रश्मि जैन एवं दीपा जैन ने अंगदान का संकल्प लिया। वहीं गजानन नामदेव आंबेकर ने देहदान का संकल्प लिया। मानव सेवा समिति के निलेश जैन ने बताया कि इस प्रकार की पहल संभवतः मध्यप्रदेश में पहली बार हुई है। उन्होंने कहा कि बड़े कथावाचकों को भी अपनी कथाओं के माध्यम से ऐसी सामाजिक पहलों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

कृष्ण-सुदामा प्रसंग का किया वर्णन
कथा के अंतिम दिन स्वामी प्रेमानंदनदास जी ने कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए भक्ति, मित्रता और समर्पण का संदेश दिया। कार्यक्रम में मानव सेवा समिति के डॉ. लालका, मनोज पटेल, निलेश जैन, मोहन चौहान, बापू काका, अमर शर्मा, राजेश पालीवाल, राजेंद्र यादव, पियूष शाह, राजेश चावला, मनीष शर्मा, चंद्रेश वसानी, मुकेश शर्मा, मनोज गुप्ता, विशाल कुमरावत, गोवर्धन वर्मा, प्रेमचंद सुराना, प्रिंस मंगल, भूषण जैन, सुभाष चंद्र तथा रक्तदान समिति के अशोक राठौड़, महेंद्र परिहार, विकास नागराज, संजय पालीवाल और नितिन ठाकुर उपस्थित रहे। अंत में स्वामी प्रेमानंदनदास जी ने रक्तदाताओं को सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किए।





