बड़वानी में मछुआरा समाज ने उठाई आवाज, सरदार सरोवर जलाशय में बाहरी ठेकेदारों को रोकने की मांग
सरदार सरोवर से विस्थापित मछुआरों ने नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुरूप अधिकार और सुविधाएं देने की मांग उठाई।

जनोदय पंच। बड़वानी में मछुआरा सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने मत्स्य विभाग पहुंचकर समस्याओं और मांगों पर चर्चा की। मछुआरों ने सरदार सरोवर जलाशय में बाहरी ठेकेदारों को रोकने, विस्थापितों को अधिकार देने और मत्स्य व्यवसाय के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
बड़वानी में बुधवार को नर्मदा माता मत्स्य उत्पादन एवं विपणन संघ के प्रस्तावित संगठन के बैनर तले बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिले की मछुआरा सहकारी समितियों के सैकड़ों प्रतिनिधि मत्स्य विभाग पहुंचे। प्रतिनिधियों ने अधिकारियों के साथ बैठक कर मछुआरा समाज से जुड़ी समस्याओं और मांगों पर चर्चा की तथा ज्ञापन सौंपा।
मछुआरों ने मांग की कि नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले के आधार पर सरदार सरोवर से विस्थापित मछुआरों को जरूरी लाभ और अधिकार दिए जाएं। साथ ही सरदार सरोवर जलाशय में बाहरी ठेकेदारों को मछली पकड़ने की अनुमति नहीं देने की मांग रखी गई।

मत्स्य व्यवसाय के लिए सुविधाओं की मांग
मछुआरों ने सहकारी समितियों के संचालक मंडल और सदस्यों को प्रशिक्षण देने, अवैध तरीके से मछली पकड़ने वालों पर कार्रवाई करने तथा बम और करंट के जरिए मछली पकड़ने पर रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा सभी मछुआरा सहकारी समितियों के लिए तौल केंद्र, मछली मंडी और मत्स्य व्यवसाय से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई।
मांगों में प्रत्येक सदस्य को न्यूनतम 35 किलो जाल, इंजन बोट, केज कल्चर और पिकअप वाहन अनुदान पर देने, लंबित नर्मदा माता मत्स्य उत्पादन एवं विपणन संघ का पंजीयन प्रमाण पत्र जल्द जारी करने तथा 15 जून से 15 अगस्त की मत्स्य प्रतिबंध अवधि में किसान सम्मान निधि की तर्ज पर 15 से 18 हजार रुपये प्रतिमाह सहायता देने की मांग भी शामिल है।
प्रशिक्षण और शासन से सहयोग की मांग
मछुआरों ने CIFA भुवनेश्वर से आधुनिक मत्स्य पालन का प्रशिक्षण दिलाने की मांग रखी। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में सरदार सरोवर से विस्थापित मछुआरों को पिकअप वाहन, नाव और जाल सहित सुविधाएं दी गई हैं। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के विस्थापित मछुआरों को भी लाभ दिया जाना चाहिए।
इस दौरान नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर मौजूद रहीं। उन्होंने मछुआरों के हक और अधिकारों का मुद्दा अधिकारियों के सामने रखा। जितेंद्र माझी ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार को मछुआरा समाज के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। अधिकारियों ने मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस दौरान श्यामा भारत, अशोक शारदीया, अनिल वर्मा, मनीष माझी, सुनीता मछुआरा और दीपक वर्मा सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधि मौजूद रहे।



