अक्षय ऊर्जा से ही सुरक्षित होगा भविष्य – डॉ. प्रमोद पंडित

बड़वानी। शासकीय आदर्श महाविद्यालय, बड़वानी में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में अक्षय ऊर्जा दिवस उत्साह एवं जागरूकता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अक्षय ऊर्जा के महत्व, ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना से अवगत कराना रहा।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ना केवल विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता है। सूर्य, पवन, जल और जैव ऊर्जा जैसे प्राकृतिक स्रोत लंबे समय तक ऊर्जा उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार और पूजनीय माना गया है। सूर्य, जल, वायु, अग्नि और पृथ्वी के प्रति सम्मान की भारतीय परंपरा आज आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ मिलकर सतत विकास का आधार बन सकती है।
डॉ. पंडित ने विद्यार्थियों से ऊर्जा संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनावश्यक विद्युत उपकरणों का उपयोग रोकना, ऊर्जा की बचत करना, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। युवा यदि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में शोध, नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ें तो भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के साथ विश्व को भी नई दिशा दे सकता है।

कार्यक्रम में प्रो. राजाराम मुवेल की विशेष सहभागिता रही। उन्होंने भारतीय जीवन-दृष्टि में प्रकृति और पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से भी सीख लेने की आवश्यकता है विज्ञान संकाय के डॉ. आकाश एसके ने अक्षय ऊर्जा के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए सौर, पवन, जल विद्युत एवं जैव ऊर्जा की उपयोगिता बताई। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार के लिए प्रेरित किया कार्यक्रम में डॉ रितेश भावसार और सभी प्राध्यापक साथियों का सहयोग रहा। विद्यार्थियों ने भी ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को लेकर विचार व्यक्त किए। अंत में उपस्थित विद्यार्थियों एवं महाविद्यालयीन परिवार ने अक्षय ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से सुरक्षित एवं सतत भविष्य का संदेश दिया।



