जनहित याचिका पर इंदौर हाईकोर्ट सख्त, शासन को 4 सप्ताह में जवाब देने के आदेश
स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं, हाईकोर्ट में सुनवाई; राज्य-केंद्र सरकार की चुप्पी पर कोर्ट नाराज

सेंधवा। म.प्र.राज्य में नवीन शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ होने को 2 माह से भी अधिक समय व्यतीत हो चुका है बावजुद इसके यहां के विद्यार्थीयो को वर्तमान मे मूलभूत एवं बुनियादी सुविधाऐं भी स्कुलो में नही मिल पा रही है। इस गंभीर समस्या को लेकर आज म.प्र. उच्च न्यायालय की इंदौर खण्डपीठ मे दायर जनहित याचिका की सुनवाई न्यायमुर्ति सुबोध अभ्यंकर एवं न्यायमुर्ति आलोक अवस्थी की बैंच के समक्ष हुई । राज्य शासन द्वारा जवाब प्रस्तुत नही किये जाने के कारण कोर्ट ने प्रकरण को 4 सप्ताह बाद तुरन्त लगाने के आदेश दिये है।
सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल.जैन द्वारा प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक तुगनावत ने न्यायालय को बताया कि याचिका कर्ता द्वारा प्रदेश की बिगडी हुई शिक्षा व्यवस्था को लेकर 22 अप्रैल को जनहित याचिका दाखिल की गई थी जिसकी सुनवाई 1 जुलाई को न्यायालय मे हुई। कोर्ट द्वारा राज्य एवं केन्द्र शासन को जवाब प्रस्तुत करने के लिये 17 अगस्त तक का समय दिया गया था लेकिन आज तक भी प्रत्यर्थीगणों द्वारा याचिका मे उठाये गये मुद्दो का जवाब प्रस्तुत नही किया गया है। सुनवाई पश्चात् कोर्ट द्वारा पुनः केन्द्र एवं राज्य शासन को 4 सप्ताह की मोहलत दी गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि शिक्षा जैसे अति गम्भीर मामले मे राज्य एवं केन्द्र शासन अनावश्यक विलम्ब कर रहा है स्पष्ट है शासन स्वंय बच्चो के मौलिक अधिकारो का खुला उल्लंघन कर रहा है। इस वजह से प्रदेश के विद्यार्थीयो मे भी अंसतोष व्याप्त होने के कारण नन्हे-मुन्हे बच्चे अपनी पढाई छोडकर बुनियादी सुविधाओ के लिये आंदोलन की राह पर उन्हे उतरना पड़ रहा है। प्रदेश मे जगह-जगह, नन्हे-मुन्हे बच्चे हाथो मे मांगो की तख्तियां लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे है। ऐसी स्थिति मे राज्य एवं केन्द्र शासन को इस संवेदनशील मुद्दे को हल्के मे न लेकर इस मामले मे गंभीररता पुर्वक विचार करते हुवे प्रदेश मे 40 प्रतिशत रिक्त शिक्षकों/प्राचार्यो की पदस्थापना की कार्यवाही करते हुवे जर्जर भवनो की मरम्मत एवं बिजली, शुद्ध पेयजल, शौचालय, बाउन्ड्रीवाल, बच्चो के युनिफार्म सहित बुनियादी सुविधाओ के लिये आवश्यक बजट की व्यवस्था कर इन समस्याओ का निराकरण प्रदेश के नौनिहालो के भविष्य के लिये करना चाहिए।



