लायंस कॉन्वेंट स्कूल में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष प्रदर्शनी का समापन 16800 विद्यार्थियों ने किया अवलोकन

सेंधवा- लायंस कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित दो दिवसीय विक्रम साराभाई अंतरिक्ष विज्ञान प्रदर्शनी का आज समापन हुआ। यह खगोल प्रदर्शनी विज्ञान, जिज्ञासा और कल्पनाशीलता का ऐसा जीवंत मंच बन गई, जहाँ बच्चों ने अंतरिक्ष को किताबों के पन्नों से निकालकर अपनी आँखों के सामने साकार होते हुए देखा। दो दिनों तक विद्यालय परिसर में विज्ञान के प्रति उत्सुकता और रोमांच का अद्भुत वातावरण बना रहा।

प्रदर्शनी के दूसरे दिन बड़वानी, धार, खरगोन सहित सेंधवा तथा आसपास के क्षेत्रों के 45 से अधिक शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों से पहुँचे लगभग 16800 विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विभिन्न मॉडल, उपकरण एवं प्रदर्शनों का अवलोकन किया। प्रदर्शनी को देखने के बाद विद्यार्थियों के चेहरों पर कौतूहल और आँखों में भविष्य के वैज्ञानिक बनने की चमक साफ दिखाई दी।

प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण इसरो अहमदाबाद के वैज्ञानिकों के साथ विद्यार्थियों का रूबरू संवाद रहा। वैज्ञानिकों ने बच्चों की जिज्ञासाओं का सहज और रोचक ढंग से समाधान करते हुए अंतरिक्ष अनुसंधान, उपग्रहों, रॉकेट तकनीक तथा भारत के अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की। प्रदर्शनी के दौरान लायंस कॉन्वेंट स्कूल के विद्यार्थियों ने विज्ञान एवं अंतरिक्ष विषय पर तैयार किए गए अपने मॉडल भी प्रस्तुत किए। इन मॉडलों में बच्चों की कल्पनाशीलता, तकनीकी समझ और भविष्य को लेकर उनकी वैज्ञानिक दृष्टि दिखाई दी। इस अवसर पर इसरो अहमदाबाद द्वारा सर्वश्रेष्ठ मॉडल तैयार करने पर उमर मंसूरी को प्रथम,कुशाग्र मंडलोई को द्वितीय तथा कनिष्क फातिमा शेख के माॅडल को तृतीय पुरस्कार दिया। इसी प्रकार पोस्टर मेकिंग में रोशन सोलंकी प्रथम, एंजल साहू,द्वितीय सुगना पाटीदार तृतीय पुरस्कार दिया गया। बेस्ट माॅडल डेमोस्ट्रेशन में अल्फिया डोसानी को प्रथम स्थान मिला। इसी प्रकार प्रदर्शनी के दौरान सर्वश्रेष्ठ सेवा कार्यों के लिए इसरो द्वारा बेस्ट वालंटियर अवार्ड हनी शर्मा, तथा सांत्वना पुरस्कार मोइन शेख,अरशान मंसूरी, जयेश चौधरी,गविश शर्मा आगम गुप्ता और मनस्वी दवे को दिया गया। पुरस्कार पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे और अन्य प्रतिभागियों को भी नवाचार के लिए प्रेरणा मिली। इस अवसर पर लायंस क्लब अध्यक्ष श्यामसुंदर तायल ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को केवल जानकारी नहीं देते, बल्कि उनमें “क्यों, कैसे और आगे क्या?” जैसे वैज्ञानिक प्रश्नों को जन्म देते हैं। यही प्रश्न आगे चलकर नई खोजों और नवाचारों की नींव बनते हैं।
इस खगोल प्रदर्शनी ने यह संदेश भी दिया कि भारत का अंतरिक्ष भविष्य केवल प्रयोगशालाओं में नहीं, बल्कि आज की इन जिज्ञासु आंखों में भी पल रहा है।



