श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 64 कलाओं एवं 14 विद्याओं के ज्ञान पर हुआ मार्गदर्शन

बड़वानी। शासकीय आदर्श महाविद्यालय, बड़वानी में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के बहुआयामी व्यक्तित्व, उनके ज्ञान, कौशल, जीवन-दर्शन तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित 64 कलाओं एवं 14 विद्याओं के महत्व से परिचित कराना था।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति में ऐसे आदर्श व्यक्तित्व हैं, जिनके जीवन में ज्ञान, कौशल, नेतृत्व, प्रबंधन, कूटनीति, कला, संगीत, अध्यात्म और कर्मयोग का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व विद्यार्थियों को यह प्रेरणा देता है कि जीवन में केवल पुस्तकीय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विभिन्न प्रकार की कलाओं, व्यावहारिक कौशल और जीवन-मूल्यों का विकास भी आवश्यक है। उन्होंने 64 कलाओं एवं 14 विद्याओं की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उसे समाज एवं राष्ट्र के लिए उपयोगी बनाना था। श्रीकृष्ण के जीवन में शिक्षा और कौशल के इस समन्वय को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग, कर्तव्यबोध, आत्मसंयम एवं नेतृत्व के संदेश को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्राचार्य डॉ. पंडित ने कहा कि वर्तमान समय में करियर निर्माण के लिए विषयगत ज्ञान के साथ संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता, तकनीकी दक्षता, निर्णय क्षमता और टीम भावना जैसी बहुआयामी क्षमताओं का विकास आवश्यक है। श्रीकृष्ण का जीवन इन सभी गुणों के विकास की प्रेरणा प्रदान करता है।कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी शिक्षाओं तथा 64 कलाओं एवं 14 विद्याओं से संबंधित विभिन्न पहलुओं को उत्साहपूर्वक समझा। जन्माष्टमी उत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि भारतीय परंपरा में ज्ञान का उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास, कर्तव्यनिष्ठा, सृजनशीलता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करना है। कार्यक्रम का समापन श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन को आत्मसात करने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रसार के संकल्प के साथ हुआ।
कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. दिनेश कुमार पाटीदार, डॉ. अनिल पाटीदार एवं प्रो. राजाराम मुवेल ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत से जुड़ने तथा उसके जीवनोपयोगी पक्षों को समझने के लिए प्रेरित किया।



