चैनपुर पुलिस का कारनामा उजागर! बस दुर्घटना की एफआईआर में बस की जगह दोपहिया वाहन का नंबर!
फरियादी तक का नाम नहीं! पुलिस को जानकारी के उपरांत भी रिपोर्ट में ड्राइवर आरोपी बस चालक श्अज्ञात!

दिनेश गीते। झिरन्या। चित्तौड़गढ़-भुसावल राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम पाडल्या के पास शुक्रवार सुबह एक यात्री बस पलटने से 13 यात्रियों के घायल होने के मामले में अब एफआईआर को लेकर ही गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस दुर्घटना की पुलिस थाना चौनपुर में दर्ज एफआईआर को पढ़ने पर सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आयी है कि उसमें फरियादी का नाम तक स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, मौके पर दुर्घटनाग्रस्त हुई एच सुरूर यात्री बस की नंबर प्लेट पर एमपी 10 झेड ई 4364 लिखा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है लेकिन एफआईआर क्र.0272/2026 में जो वाहन एमपी 10 झेड ई 4346 लेख किया गया गया है वह किसी दोपहिया वाहन का है। अब सवाल यह उठता है कि किस वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से यात्री घायल हुए है?

पुलिस की ओर से शुक्रवार सुबह हादसे के बाद दोपहर लगभग 1 बजे पत्रकारों को बस सड़क दुर्घटना के संबंध में जानकारी उपलब्ध करायी गयी थी जिसमें बस मालिक साबिर बी., चालक आरिफ बेग और कंडक्टर दिनेश के नाम बताए गए थे। चालक-कंडक्टर के मौके से फरार होने की जानकारी भी दी गई थी। दोपहर लगभग 3 बजे दर्ज हुई एफआईआर में आरोपी चालक को अज्ञात बताया गया हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि पुलिस को जब संबंधित लोगों की जानकारी पहले से ही थी, तो फिर एफआईआर में आरोपी चालक की जानकारी क्यों छुपाई गयी गयी ? क्या किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा अन्य वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज किये गये?

रिपोर्ट किसने लिखवाई, किसके खिलाफ लिखी एफआईआर खामोश
एफआईआर में सबसे अहम जानकारियां ही नजर नहीं आतीकृरिपोर्ट किसने लिखवाई? किसके खिलाफ लिखवाई गई? किस कंपनी की बस थी? बस का सही पंजीयन नंबर क्या था? चालक-कंडक्टर की पहचान क्या थी? हादसे के मूल तथ्यों से जुड़ी जानकारीयों का अभाव एफआईआर में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता हैं। विडंबना यह है कि ऐसी एफआईआर दर्ज करने का क्या औचित्य जिसमें फरियादी की जानकारी तक स्पष्ट नहीं हो और हैरानी कि बात यह है कि फरियादी के बताये अनुसार सभी रिश्तेदारों के नाम तो एफआईआर में लेख किये गये है लेकिन स्वयं फरियादी का पुरा नाम न हो! पुलिस की इस तरह की संदेहास्पद कार्यशैली में उनकी कार्यकुशलता और लापरवाही दोनों पर सवाल खड़े होना लाज़मी है।

2 घंटे पहले नाम सामने, फिर भी एफआईआर में आरोपी बस चालक ‘अज्ञात’ क्यों?
मामले में एक और विरोधाभास सामने आया है। पुलिस की जानकारी के अनुसार बस मालिक,चालक और कंडक्टर के नाम सामने आ चुके थे तथा चालक-कंडक्टर के फरार होने की बात भी कही गई थी। इसके बावजूद एफआईआर में आरोपी चालक श्अज्ञातश् क्यों ? क्या पुलिस द्वारा एफआईआर तैयार करते समय जरूरी तथ्यों की अनदेखी की गयी या जानबूझकर उन्हें दर्ज ही नहीं किया गया? इस मामले में थाना प्रभारी गणपत कनेल ने बताया कि फरियादी को आरोपी चालक का नाम नहीं मालूम होगा वह जो लिखवायेगा वही हम एफआईआर में लिखेंगे। ये तो अब जांच का विषय है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या फरियादी को स्वयं का नाम भी नहीं मालूम था जो एफआईआर से उसका नाम ही नदारद है!
मामले में एसडीओपी भीकनगांव केतन अडलक ने कहा कि मामले को मैं चेक करवाता हूं।



