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रमज़ान में नन्ही रोजेदार नाज़ फातिमा बनी चर्चा का विषय, 13 घंटे 13 मिनट भूखी-प्यासी रहकर की इबादत

जनोदय पंच। सेंधवा। मुस्लिम समाज का पवित्र महीना रमज़ान शरीफ इबादत, सब्र और नेकियों का महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखकर अपने रब की इबादत करते हैं और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देते हैं। सेंधवा शहर में भी रमज़ान के मौके पर धार्मिक आस्था और उत्साह का माहौल बना हुआ है।

इसी क्रम में शहर के रज़ा नगर टैगोर बेड़ी क्षेत्र निवासी इमरान शेख की 6 वर्षीय बेटी नाज़ फातिमा ने रोजा रखकर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। नन्ही रोजेदार नाज़ फातिमा ने करीब 13 घंटे 13 मिनट तक भूखी और प्यासी रहकर पूरे समर्पण के साथ रोजा रखा। इतनी कम उम्र में रोजा रखने की उसकी लगन और हौसले की शहर में सराहना की जा रही है।

गर्मी के मौसम के बावजूद नाज़ फातिमा ने पूरे दिन धैर्य और उत्साह के साथ रोजा रखा। परिवार के सदस्यों ने भी बच्ची के इस हौसले की प्रशंसा करते हुए उसे प्रोत्साहित किया। समाज के लोगों का कहना है कि कम उम्र में बच्चों के भीतर धार्मिक संस्कार और इबादत की भावना जागृत करना एक अच्छी पहल है, जिससे वे बड़े होकर अपने मजहबी कर्तव्यों को पूरी निष्ठा के साथ निभा सकें।

रमज़ान के रोजों का महत्व केवल इबादत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसान को सब्र, संयम और इंसानियत का संदेश भी देता है। इस्लाम में रोजा रखने का उद्देश्य यह भी बताया गया है कि जब इंसान भूख और प्यास को महसूस करता है तो उसके मन में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने की भावना जागृत होती है।

सेंधवा में नन्ही रोजेदार नाज़ फातिमा का यह कदम लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है। समाज के लोग उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उसे दुआएं दे रहे हैं

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