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इंदौर। 8 घंटे काम के बाद भी 300 रुपए नहीं, महिला श्रमिकों की पीड़ा मजदूर दिवस पर सामने आई

इंदौर। मजदूर दिवस के अवसर पर बजरंग पूरा सामुदायिक भवन में श्रमिक पैरवी एवं अधिकार केंद्र द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महिला श्रमिकों की स्थिति सामने आई। श्रमिक संवाद के दौरान महिलाओं ने बताया कि वे फैक्ट्रियों में 8 घंटे काम करने के बावजूद 300 रुपए प्रतिदिन तक की मजदूरी भी प्राप्त नहीं कर पा रही हैं, जो न्यूनतम मजदूरी से कम है। महंगाई के कारण जीवन-यापन करना और कठिन होता जा रहा है।

कार्यक्रम में श्रमिकों के अधिकार, न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा (PF, ESIC) एवं कार्यस्थल सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान श्रमिकों ने समय पर वेतन भुगतान, ठेकेदारी व्यवस्था में पारदर्शिता और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग उठाई।

“इतनी मेहनत के बाद भी परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है,” एक महिला श्रमिक ने अपनी बात रखते हुए कहा।

संस्था के कृष्णार्जुन बर्वे ने बताया कि बैठक और चर्चा के दौरान सभी श्रमिकों की सहमति से 5 प्रमुख मांगों पर सहमति बनी, जिनमें महिला श्रमिकों को न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना, ठेकेदारी व्यवस्था में पारदर्शिता, बैंक/डिजिटल माध्यम से भुगतान, गर्मी में पेयजल की व्यवस्था तथा प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलो गैस सिलेंडर सुलभ कराना शामिल है। मजदूर दिवस पर नाका अभियान के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर श्रमिकों को उनके अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया गया।

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