मनमाड-इंदौर रेल परियोजना के टेंडर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संघर्ष समिति को दी बधाई

इंदौर/सेंधवा। मनमाड-इंदौर रेल परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रहे संघर्ष और प्रयासों के बीच परियोजना के टेंडर जारी होने पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष एवं पद्मभूषण आदरणीय सुमित्रा महाजन (ताई) ने मनमाड-इंदौर संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे और समिति के सदस्यों को बधाई दी।
आदरणीय सुमित्रा महाजन ने अपने आवास पर मनोज मराठे एवं संघर्ष समिति के सदस्यों को आमंत्रित कर परियोजना के टेंडर जारी होने की खुशी में मिठाई खिलाई और उनका अभिनंदन किया। इस दौरान संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने आदरणीय ताई को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया तथा आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर सुमित्रा महाजन ने कहा कि मनमाड-इंदौर रेल परियोजना को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने तत्कालीन धुलिया सांसद आदरणीय सुभाष भामरे जी के साथ मिलकर मंत्रालय जाकर परियोजना को लेकर प्रयास किए। पिछले दो वर्षों में भी इस संबंध में अनेक पत्राचार किए गए। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि जिस परियोजना का उद्घाटन किया गया है, उसका काम शुरू करवाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “लेकिन मनमाड-इंदौर संघर्ष समिति ने जिस तरह लगातार मेहनत की और जमीन से लेकर न्यायालय तक लंबी लड़ाई लड़ी, वह वास्तव में प्रशंसा के योग्य है। आप और पूरी संघर्ष समिति बधाई के पात्र हैं। आप मेरा सम्मान करने आए हैं, जबकि वास्तव में मुझे आपका सम्मान और सत्कार करना चाहिए।”
सुमित्रा महाजन ने कहा कि यदि परियोजना के लिए काम अलग-अलग चरणों में शुरू किया जाता है तो निर्माण कार्य को गति मिल सकती है। इस पर संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने बताया कि समिति ने अधिकारियों से मांग की थी कि परियोजना को तीन से चार डीपीआर में विभाजित कर अलग-अलग टेंडर जारी किए जाएं, ताकि प्रत्येक हिस्से का काम जल्द शुरू हो सके।
मराठे ने बताया कि समिति की इस मांग पर अमल हुआ है और पहला टेंडर मनमाड-इंदौर रेल परियोजना के महू से धामनोद के पास गयासपुर तक लगभग 72 किलोमीटर हिस्से के लिए जारी किया गया है। इसके बाद सेंधवा से धामनोद के बीच के हिस्से के लिए भी अगला टेंडर जारी होने की उम्मीद है।

“अपनी आंखों से परियोजना का काम शुरू होते देखना चाहती हूं”
सुमित्रा महाजन ने भावुक होते हुए कहा कि वे सेंधवा आकर संघर्ष समिति और क्षेत्र के लोगों से मिलना चाहती थीं, लेकिन 84 वर्ष की उम्र में स्वास्थ्य कारणों से अब उनका आना-जाना कम हो गया है।
उन्होंने कहा, “जब तक मेरी आंखों में देखने और कानों में सुनने की ताकत है, मैं चाहती हूं कि इस परियोजना का काम अपनी आंखों से शुरू होते हुए देखूं।”
सेंधवा से अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए ताई ने कहा कि महाराष्ट्र से आते-जाते समय उनका सेंधवा में अक्सर रुकना होता था। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय रामचंद्रजी बड़े साहब के परिवार से उनकी पुरानी नातेदारी रही है।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय रामचंद्रजी बड़े साहब ने आदिवासी क्षेत्र में पट्टा वितरण को लेकर बहुत अच्छा कार्य किया था। उन्होंने कहा की ईस काम को राष्ट्रीय जनजाती आयोग के अध्यक्ष आदरणीय अंतर सिंह आर्य जी आगे बडा रहै हे को अपना नमस्कार पहुंचाने की बात कही तथा उनके परिवार मे बेटे विकास जी व्दारा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की।
“आपके सहयोग के बिना यह लंबी लड़ाई संभव नहीं थी”
मुलाकात के दौरान मनोज मराठे ने आदरणीय सुमित्रा महाजन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मनमाड-इंदौर रेल परियोजना को लेकर संघर्ष को आगे बढ़ाने में उनका सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले आदरणीय ताई का पत्र प्राप्त हुआ था, जिसमें उन्होंने बताया था कि वे भी इस परियोजना के लिए पूर्व से प्रयास कर रही हैं और संघर्ष समिति को हरसंभव सहयोग देंगी। मराठे ने कहा कि ताई ने लगातार समिति का मार्गदर्शन और सहयोग किया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
मराठे ने आदरणीय नाम जोशी जी, जो रेलवे मंडल एवं भारत सरकार के सलाहकार रहे हैं, के सहयोग का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदरणीय नामदेव जोशी जी के माध्यम से संघर्ष समिति को समय-समय पर महत्वपूर्ण सहयोग, मार्गदर्शन और आवश्यक मदद मिलती रही है। उनका सहयोग संघर्ष समिति के लिए हमेशा यादगार रहेगा और उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
संघर्ष समिति के सदस्यों को ताई ने दिया आशीर्वाद
आदरणीय सुमित्रा महाजन के निवास पर हुई इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे के साथ मनोज पाटिल, फिरोज शेख एवं श्यामलाल नीगवाल उपस्थित रहे।
इस दौरान ताई ने सभी सदस्यों से चर्चा की, उनका हालचाल जाना और चाय-पान करवाकर सभी को आशीर्वाद दिया। मनमाड-इंदौर रेल परियोजना के टेंडर जारी होने को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए संघर्ष समिति के सदस्यों ने इसे वर्षों से चल रहे जनसंघर्ष, न्यायालयीन प्रयासों और लगातार किए गए पत्राचार एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग की दिशा में एक बड़ी सफलता बताया।
संघर्ष समिति ने उम्मीद जताई कि परियोजना के आगामी हिस्सों के भी टेंडर शीघ्र जारी होंगे और मनमाड-इंदौर रेल मार्ग का निर्माण कार्य धरातल पर तेजी से आगे बढ़ेगा।



