बड़वानी जिले के जनजातीय अंचल में संजीवनी बने जल संसाधन विभाग के तालाब,4700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लौटी हरियाली
पानसेमल, पाटी और सेंधवा तहसील की 4 प्रमुख जल परियोजनाएँ बदल रही है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

बड़वानी; मध्य प्रदेश का निमाड़ अंचल अपनी समृद्ध कृषि विविधता और जीवंत संस्कृति के लिए जाना जाता है। हालांकि, वर्षा की अनियमितता और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सिंचाई जल की उपलब्धता यहाँ सदैव विकास की प्रमुख चुनौती रही है। बड़वानी जिले में इस चुनौती से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में जल संरक्षण की दूरगामी कार्ययोजना को धरातल पर उतारते हुए विगत वर्षों में चार प्रमुख तालाबों का निर्माण किया गया है।
बड़वानी जिले के पाटी,पानसेमल एवं सेंधवा तहसील में जल संसाधन विभाग द्वारा विगत वर्षों में चार प्रमुख तालाब-बेड़ादा,गोमई, झांडिया कुण्डिया एवं टोरी तालाब का निर्माण किया गया। जल परियोजनाओं ने न केवल सिंचाई के परिदृश्य को इन क्षेत्रों में बदला बल्कि जिले के समग्र आर्थिक, सामाजिक एवं अब संरचनात्मक विकास को भी नई गति प्रदान की है।

1.पाटी तहसील का बेड़दा तालाब
आकांक्षी विकासखण्ड पाटी में निर्मित यह तालाब जिले के ग्राम गंधावल,पलवट,मोसवाड़ा के कृषकों को सीधे लाभान्वित कर रहा है। 8.53 मि.घ.मी. जलभराव क्षमता का यह तालाब 1390 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित कर रहा है।
2.पानसेमल तहसील के गोमई एवं झांडिया कुण्डिया तालाब
तहसील पानसेमल के अंतर्गत आने वाले गोमई नदी तालाब और झंडिया कुण्डिया तालाब इस क्षेत्र के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने में महती भूमिका निभा रहे हैं। लगभग 7.88 मिलियन घन मीटर की जलभराव क्षमता वाला गोमई नदी तालाब 1,240 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा प्रदान कर रहा है, जिससे मालकातर, हरनिया,पाडला, चिखल्या, दोदवाड़ा, ओसवाड़ा और मोयदा जैसे गाँव सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। इसके साथ ही, 2.525 मिलियन घन मीटर जलभराव क्षमता से युक्त झंडिया कुण्डिया तालाब 385 हेक्टेयर रकबे को सींच रहा है, जिसका सीधा लाभ मोयदा, खडीखम और सकराली गाँवों के किसानों को मिल रहा है।
3.सेंधवा तहसील का टोरी तालाब :तहसील सेंधवा के अंतर्गत निर्मित टोरी तालाब अपनी 10.45 मिलियन घन मीटर की विशाल जलभराव क्षमता के साथ क्षेत्र में जल क्रांति का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस परियोजना से 1,730 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित हो रही है, जिसने यहाँ के कृषि परिदृश्य में अभूतपूर्व परिवर्तन लाया है। इस तालाब का सीधा लाभ हिंगवा, किरमला, बलवाड़ी एवं कुटवाड़ी गाँवों के कृषकों को मिल रहा है।
4,700 हेक्टेयर से अधिक बढ़ा सिंचाई रकबा, फसलों का बढ़ा उत्पादन
सिंचाई क्षमता में 4,700 हेक्टेयर से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि होने से बड़वानी जिले में कपास, मिर्च और सब्जियों जैसी नकदी फसलों के साथ-साथ उन्नत कृषि तकनीकों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है। जल की नियमित उपलब्धता से किसान अब वर्ष में दो से तीन फसलें सफलतापूर्वक ले रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
किसानों की जुबानी: ‘जीवन में आया सकारात्मक बदलाव’
लाभान्वित किसान एवं ग्राम पटेल श्री बिहारी सस्ते ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, “पहले सिंचाई का कोई स्थायी साधन न होने से बहुत परेशानियों का सामना करना पढ़ता था। हम अपनी कुल कृषि भूमि के केवल 25 प्रतिशत भाग पर ही जैसे-तैसे खेती कर पाते थे और गेहूं जैसी फसल बोने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते थे। परंतु, तालाब के निर्माण से क्षेत्र के कुओं और ट्यूबवेलों का जल स्तर काफी बढ़ गया है, जिससे अब वे अपने पूरे खेत में भरपूर फसलें उगा रहे हैं। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि अब उन्हें और उनके परिवार को मजदूरी के लिए गाँव छोड़कर बाहर नहीं भटकना पड़ता; वे अपने ही घर पर रहकर गर्व से खेती कर रहे हैं। इस बदलाव से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है, बल्कि वे अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजकर बेहतर शिक्षा दिला पा रहे हैं।”

भूजल पुनर्भरण एवं पर्यावरण संतुलन में आया सुधार
इन जल संरचनाओं से क्षेत्र के भू-जल पुनर्भरण और पर्यावरणीय संतुलन में बड़ा सुधार आया है। गूगल अर्थ की ‘पूर्व और पश्चात्’ तस्वीरों से साफ दिखता है कि जहाँ पहले शुष्क पहाड़ियां और बंजर ज़मीन थी, वहाँ अब विशाल जलाशयों के बनने से आसपास का वाटर-टेबल काफी सुधर गया है। इसके प्रभाव से क्षेत्र के कुएँ और बोरवेल वर्षभर रिचार्ज रहते हैं।
जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित ये तालाब केवल पानी के भंडार नहीं, बल्कि बड़वानी जिले के आर्थिक और सामाजिक विकास की जीवनरेखा बन चुके हैं। “खेत का पानी खेत में, गाँव का पानी गाँव में” के मंत्र को चरितार्थ करते हुए यह पहल जिले में सतत कृषि और जल-संरक्षण का एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करती है। जो प्रत्येक नागरिक की समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की नींव को सुदृढ़ कर रहे हैं।



