शिवमहापुराण कथा के पांचवें दिन मां बगलामुखी और मातंगी के स्वरूप का वर्णन, जल संरक्षण के लिए देशभर में कांवड़ यात्रा निकालने का किया आह्वान

निवाली। कुसमिया मेला ग्राउंड में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा के पांचवें दिन पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मनुष्य के वर्तमान जीवन में मिलने वाले सुख-दुख को वे पूर्व जन्मों के कर्मों से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार, संतान और पड़ोस से जुड़े अनुभवों में भी कर्मों की भूमिका मानी गई है। भगवान की भक्ति और अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में मार्ग दिखाती है।

कथा में उन्होंने मां बगलामुखी और मां मातंगी के स्वरूपों का वर्णन करते हुए देवी महिमा के प्रसंग सुनाए। उन्होंने श्रद्धालुओं को आस्था, साधना और धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया। साथ ही कहा कि व्यासपीठ से बताए गए धार्मिक उपायों को श्रद्धा के साथ अपनाने की परंपरा रही है।
देशभर में कांवड़ यात्रा और जल संरक्षण का संदेश
एक शिवभक्त परिवार की ओर से गुरुदेव पं. प्रदीप मिश्रा से आग्रह किया गया कि सावन में देशभर के गांवों और नगरों में स्थानीय कांवड़ यात्राओं का आह्वान किया जाए। इससे जो श्रद्धालु सीहोर नहीं पहुंच पाते, वे अपने क्षेत्र के नदी, तालाब, कुएं और बावड़ियों से जल लेकर स्थानीय शिवालयों में अर्पित कर सकेंगे। इस पहल से प्राचीन जल स्रोतों की सफाई, संरक्षण और जल संचयन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

आयोजन में सहयोग देने वालों का आभार
कथा के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, स्वास्थ्य एवं विद्युत विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कथा के लिए भूमि उपलब्ध कराने वाले परिवार की भी सराहना की गई। भूमि स्वामी ने कथा स्थल के समीप भगवान शिव के मंदिर निर्माण की इच्छा जताई।

कथा में श्रद्धालुओं से सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति व जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।



