सेंधवा में शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कार्तिकेय, गणेश जन्मोत्सव और मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग प्रसंग का हुआ वर्णन
परम पूज्य श्री गोपेश्वरदेव जी महाराज के श्रीमुख से कथा श्रवण, गुरु सम्मान और धार्मिक प्रसंगों से श्रद्धालु हुए भावविभोर

जनोदय पंच। सेंधवा में आयोजित दिव्य श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कार्तिकेय, गणेश जन्मोत्सव, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और शिव परिवार से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथा के दौरान सुशील चोमू वाला एवं अरुण ठक्कर महाराष्ट्रीयन समाज ने गुरु सम्मान भी किया।
कथा के चौथे दिन धार्मिक प्रसंगों का वर्णन
सेंधवा में आयोजक गौरीशंकर कथा समिति के तत्वावधान में परम पूज्य श्री गोपेश्वरदेव जी महाराज के श्रीमुख से दिव्य श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन जारी है। मंगलवार को कथा के चौथे दिन विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। इस अवसर पर सुशील चोमू वाला एवं अरुण ठक्कर महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा गुरुदेव का सम्मान किया गया।

कार्तिकेय के पराक्रम और गणेश जन्मोत्सव का वर्णन
कथा में बताया गया कि सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र भगवान कार्तिकेय को प्रदान किए, जिसके बाद महाबली कार्तिकेय ने तारकेश्वर का वध किया। साथ ही पाताल में प्रडंब राक्षस के वध तथा शेषनाग के पुत्र सहित समस्त नागों की रक्षा का प्रसंग भी सुनाया गया। कथा के दौरान भगवान गणेश का जन्मोत्सव भी मनाया गया। बालक कार्तिकेय को छह कृतिकाओं द्वारा दुग्धपान कराने के कारण उनका नाम कार्तिकेय होने का प्रसंग भी श्रद्धालुओं को बताया गया।
गणेश और कार्तिकेय के विवाह प्रसंग की कथा
श्री गोपेश्वरदेव जी महाराज ने कहा कि कल्पांतकाल के भेद के कारण कथाओं में विभिन्न प्रसंग मिलते हैं, इसलिए महादेव के विवाह में गणेश जी की उपस्थिति जैसे प्रश्न नहीं उठाने चाहिए। उन्होंने गणेश और कार्तिकेय के विवाह से जुड़ा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि पृथ्वी की परिक्रमा की शर्त रखी गई थी। भगवान गणेश ने माता-पिता को पृथ्वी से भी बड़ा मानते हुए उनकी परिक्रमा की और बुद्धि के बल से प्रथम स्थान प्राप्त किया। कथा में यह भी बताया गया कि सिद्धि की उपासना से शुभता, बुद्धि की पूजा से लाभ तथा भगवान गणेश की आराधना से शुभता और लाभ दोनों प्राप्त होते हैं।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और कैलाश प्रसंग
कथा के दौरान मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का प्रसंग भी सुनाया गया। बताया गया कि अमावस्या को महादेव और प्रत्येक पूर्णिमा को माता पार्वती वहां पधारती हैं। कथा श्रवण के महत्व का भी उल्लेख किया गया। वहीं कैलाश पर होली के प्रसंग का वर्णन होने पर कथा पंडाल श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति से झूम उठा।



