सेंधवा के प्राचीन शनि मंदिर को खोलने की मांग तेज, विभिन्न समाजों के नागरिकों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
मंदिर में पूजा-अर्चना बहाल करने और आस्था से जुड़ी गतिविधियां शुरू कराने की उठाई मांग

जनोदय पंच। सेंधवा के प्रमुख नागरिकों ने प्राचीन शनि मंदिर को खोलने की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मंदिर से जुड़ी धार्मिक आस्था, सामाजिक गतिविधियों और पूजा-अर्चना प्रभावित होने का उल्लेख किया गया। इस दौरान विभिन्न समाजों के नागरिक, जिनमें मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।
सेंधवा शहर के प्रमुख नागरिकों ने मंगलवार को पुराने शनि मंदिर को खोलने की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि यह शनि मंदिर लगभग 50 से 60 वर्ष पुराना है और लंबे समय से शहरवासियों की धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। नागरिकों ने कहा कि मंदिर बंद होने से श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना प्रभावित हो रही है, इसलिए इसे शीघ्र खोला जाना आवश्यक है।
आस्था और धार्मिक आयोजनों का दिया उल्लेख
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्रत्येक वर्ष शनि जयंती पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन, पूजा और भंडारे में शामिल होते रहे हैं। इसके साथ ही भंडारे की सामग्री गरीब बस्तियों तक पहुंचाकर पुण्य लाभ लेने की परंपरा भी रही है। नागरिकों ने कहा कि मंदिर बंद रहने से इन धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने मंदिर को खोलकर नियमित पूजा-अर्चना की व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
मुस्लिम समुदाय ने भी किया समर्थन
ज्ञापन सौंपने के दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी मंदिर खोले जाने की मांग का समर्थन किया। इस अवसर पर इकबाल शाह, फिरोज मंसूरी, हाफिज साहब सहित अन्य मुस्लिम धर्मावलंबी उपस्थित रहे। ज्ञापन के वाचन के बाद सभी उपस्थित नागरिकों ने एकमत होकर एसडीएम के प्रति आभार व्यक्त किया।

विभिन्न संगठनों और नागरिकों की रही मौजूदगी
ज्ञापन सौंपने के दौरान एडवोकेट प्रशांत सेन, जुलू अप्पा, मंदिर के पुजारी शिव शर्मा, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र गाडवे, एनएसयूआई अध्यक्ष किशन शर्मा, कमल चौहान, राहुल शर्मा, प्रभु पाटिल, अरुण चौहान सहित अन्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने एसडीएम से प्राचीन शनि मंदिर का ताला खुलवाने की मांग करते हुए कहा कि मंदिर बंद रहने से श्रद्धालुओं की आस्था और पूजा-अर्चना बाधित हो रही है, इसलिए मंदिर को खोला जाना आवश्यक है।



