बड़वानी में UCC विधेयक पर मुस्लिम समाज की आपत्ति, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग
मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 के विरोध में समाजजनों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण की मांग रखी।

जनोदय पंच। बड़वानी में समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 के विरोध में मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रदर्शन कर कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विधेयक को संविधान की मूल भावना के विपरीत बताते हुए मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण की मांग की गई।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 के विरोध में बुधवार दोपहर बड़वानी में मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया। समाज के प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम नायब तहसीलदार सोनू गोयल को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में इस विधेयक को संविधान विरोधी बताते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है। समाजजनों ने विधानसभा द्वारा पारित इस विधेयक को संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया।
अनुच्छेद 44 और संविधान की भावना का दिया हवाला
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि अनुच्छेद 44 को नीति निदेशक तत्वों में रखा गया था, न कि मौलिक अधिकारों में। समाजजनों ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि इसे किसी समाज पर थोपने के बजाय उसकी सहमति से लागू किया जाना चाहिए।

पर्सनल लॉ और विवाह नियमों में बदलाव पर आपत्ति
मुस्लिम समाज ने विवाह के 60 दिनों के भीतर अनिवार्य पंजीकरण, फर्स्ट कजिन विवाह पर प्रतिबंध और एक-विवाह की अनिवार्यता को पर्सनल लॉ के खिलाफ बताया है।
इसके अलावा बहुविवाह को शून्य घोषित करने और तलाक के लिए केवल अदालती डिक्री को अनिवार्य करने वाले प्रावधानों का भी विरोध किया गया है।
उत्तराधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी मांगें
ज्ञापन में उत्तराधिकार के मामले में इस्लामी कानून की वसीयत संबंधी एक-तिहाई सीमा को बरकरार रखने की मांग की गई। समाजजनों ने एसटी वर्ग को छूट देकर अन्य समुदायों पर इसे लागू करने के बजाय समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का पालन करने की बात कही।
इसके साथ ही अनुच्छेद 25, 26 और 29 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण की मांग रखी गई। समाजजनों ने देश की विविधता में एकता के सिद्धांत को बनाए रखते हुए धार्मिक पहचान से छेड़छाड़ पर रोक लगाने की मांग की।



