राजराजेश्वर धाम पारायण समिति सेंधवा ने धार जिले के अमझेरा गांव के 7000 साल पुराने आम का झुमका माता मंदिर में किया रामायण पाठ

जनोदय पंच। सेंधवा। राजराजेश्वर धाम सेंधवा की रामायण सेवा समिति ने के 25 सदस्यों का दल कल धार जिले के अमझेरा ग्राम के पुरातन मंदिर द्वापर युग से जुड़े आम का झुमका माता मंदिर के प्रांगण में जाकर किया
रामायण का पाठ जहां यह दल प्रातः 7 बजे राजेश्वर धाम सेंधवा से रवाना होकर गंगा शिव में स्नान कर भाव भक्ति से भगवान शिव की आराधना की तत्पश्चात प्रातः 9 बजे आम का झुमका मंदिर प्रांगण पहुंचा जहां रामायण मंडली के द्वारा भगवान शिव एवं माता रानी की विधि विधान से पूजा अर्चना कर माता के आंगन में बैठकर रामायण का पाठ किया

तत्पश्चात महा आरती कर प्रसादी वितरण की ज्ञात हो गंगा महादेव अमझेरा की पहाड़ी में बसा हुआ पुरातन स्वयंभू शिव पाताल में बसा शिव है जहां प्रकृति द्वारा झरने के रूप में सहस्त्र धारा यहां गिरती है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस गंगा महादेव के नाम से जाना जाता है यहां के विद्वान पंडित श्री हिमगिरी गोस्वामी महादेव ने बताया कि यह स्थान बहुत ही पुराना एवं दर्शनीय स्थल है जहां श्रवण के महीने में क्षेत्र हीनहीं दूर-दूर के भक्त गण यहां आकर भगवान शिव की आराधना करते हैं

हमारे परिवार की यहां पांचवीं पीढ़ी भगवान की सेवा में लगी है राज राजेश्वर रामायण सेवा समिति के श्री सुरेश तायल बताया कि राजेश्वर परायण समिति विगत 6 दशक से राजराजेश्वर मंदिर प्रांगण सेंधवा में श्रवण के माह में पूरा एक माह करीब 100 लोग यहाँ रामायण का पाठ करते आ रहे हैं और स पीढ़ी दर पीढ़ी इस अभियान में जुड़ते जा रहे हैं इसी परिपेक्ष में प्रतिवर्ष एक दिन की रामायण का पाठ पुराने शिवालय पर जाकर एक दिन का रामायण पाठ की परंपरा विगत कई वर्षों से चली आ रही है इस धर्म यात्रा में रामायण सेवा समिति के सुरेश तायल बिहारी तायल गिरधारी गोयल विनोद शर्मा महेश खंडेलवाल कैलाश मित्तल सुनील गुप्ता राजू मालवीय राजकुमार सिंघानी राधेश्याम गोयल अर्पित गोयल अजय तिवारी अजय शर्मा नंदकिशोर शर्मा हरिओम शर्मा संजय गोयल घड़ी साबुन वाले अजय निया कमलेश पालीवाल राधेश्याम शर्मा अजय अग्रवाल विनोद शर्मा आदि जन उपस्थित होकर इस धर्म या अपना यात्रा को सफल बनाया परम समिति के विनोद शर्मा ने बताया कि उनका झुमका माता का मंदिर द्वापर युग का है जहां भगवान कृष्ण ने माता रुक्मणी का हरण इसी स्थान से किया था बताया जाता है की माता रुक्मणी की कुलदेवी का यह मंदिर है जहां माता रुक्मणी रोज पूजा कर करती थी।




