बड़वानी; शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का स्थापना दिवस भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया गया
शिक्षा में भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखना आवश्यक – डॉ. वीरेंद्र कुमार गुप्ता

बड़वानी; शिक्षा संस्कृति शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और शासकीय आदर्श महाविद्यालय, बड़वानी के संयुक्त संयोजन से शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का स्थापना दिवस कार्यक्रम भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. वीरेंद्र कुमार गुप्ता परीक्षा नियंत्रक मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग इंदौर मुख्य अतिथि श्री राजेश गुप्ता विशेष अतिथि श्री रामसागर मिश्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ वंदेमातरम से हुआ। सरस्वती पूजन और दीप प्रज्वलन के पश्चात अतिथि स्वागत परिचय कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. प्रमोद पंडित प्राचार्य ने देते हुए कहा कि आज भारतीय ज्ञान परंपरा संस्कृति और संस्कार का दिवस भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में मना रहे हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री राजेश गुप्ता ने कहा कि ज्ञान के साथ विवेक हो तभी वह सुफल होता है। संस्कार के साथ संस्कृति फलती फुलती है, जो जीवन जीने का पाठ सिखाएं वह वास्तव में गुरू.है। विशेष अतिथि के रूप में श्री रामसागर मिश्र ने कहा कि शिक्षा में ज्ञान परंपरा, स्वाभिमान, स्वालंबन का समावेश आवश्यक है। प्राचीन गुरुकुल पद्धति व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण रही। मुख्य वक्ता डॉ वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति शिक्षा के केंद्र में होना चाहिए। हमारी परंपरा में जो वैज्ञानिकता है उसे ही प्रमाण के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के माध्यम से वैदिक गणित, भारतीय ज्ञान परंपरा पर्यावरण, शिक्षक शिक्षा, शिक्षा से आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थान दिया गया। स्थानीय लोकनायक, लोकभाषा, लोक परंपराओं को पाठ्यक्रमों में शामिल करने का उद्देश्य परंपराओं से विद्यार्थियों को जोड़ना। यह दुर्भाग्य था कि स्वतंत्रता के बाद भी मैकाले की शिक्षा पद्धति ने अंग्रेजी हुकूमत को भारतीय जनमानस पर हावी रखा। मैक्समूलर ने संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन कर जो आलोचना के विषय हो सकते थे उन्हें केंद्र में रखकर भारतीय समाज पर प्रश्न चिन्ह लगाये जबकि वेदों में पुराणों में उपनिषदों में जो ज्ञान था उस पर विदेश में रिसर्च हुआ और उस ज्ञान से उन्होंने विभिन्न प्रकार परीक्षण कर वैज्ञानिक अनुसंधान संपन्न किये। वास्तव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए अमृत मंथन का काम शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के माध्यम से किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल पाटीदार के द्वारा किया गया और आभार डॉ. बी.एस.मुझाल्दा ने व्यक्त किया। डॉ. दिनेश पाटीदार ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। कार्यक्रम के में अतिथियों को स्मृति चिन्ह दिया और राष्ट्र गान के साथ समापन किया कार्यक्रम में जिला संयोजक डॉ.मंशाराम बघेल सहसंयोजक प्रांत के विषय संयोजक तथा बड़वानी और आसपास के विभिन्न महाविद्यालय के प्राध्यापक विद्यालयों के शिक्षक और बडी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।



