सेंधवा में 14 सितंबर को पहुंचेंगे दादा गुरु, दर्शन के साथ पौधारोपण और महाआरती में होंगे शामिल
सुबह श्रद्धालुओं को देंगे दर्शन, दोपहर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत करेंगे पौधारोपण

रमन बोरखड़े। सेंधवा में 14 सितंबर को एक दिवसीय प्रवास पर संत दादा गुरु पहुंचेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन और आशीर्वाद देने के साथ पौधारोपण करेंगे। शाम को गणेश पंडाल में आयोजित महाआरती व पूजन में शामिल होंगे। आगमन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
14 सितंबर को सेंधवा पहुंचेंगे दादा गुरु
नर्मदा सपूत एवं महान तपस्वी संत दादा गुरु 14 सितंबर को एक दिवसीय प्रवास पर सेंधवा पधारेंगे। उनके आगमन को लेकर श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों में उत्साह का माहौल है। प्रवास के दौरान दादा गुरु विभिन्न धार्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आयोजनों में शामिल होंगे तथा श्रद्धालुओं को दर्शन एवं आशीर्वाद प्रदान करेंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दादा गुरु सुबह लगभग 11 बजे नगर पालिका अध्यक्ष बसंती बाई यादव के निवास पर पहुंचेंगे। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।

सेंधवा नगर वन में करेंगे पौधारोपण
इसके बाद दोपहर में दादा गुरु सेंधवा नगर से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित सेंधवा नगर वन पहुंचेंगे। यहां ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत उनके द्वारा पौधारोपण किया जाएगा। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं मां नर्मदा के प्रति आस्था का संदेश भी दिया जाएगा।
प्रेम मंदिर की आकृति वाले गणेश पंडाल में महाआरती
दादा गुरु के प्रवास का प्रमुख धार्मिक कार्यक्रम शाम 7:30 बजे आयोजित होगा। वे दिनेशगंज एकता संगठन दारुगोदाम द्वारा निर्मित भव्य गणेश पंडाल में पहुंचेंगे। इस वर्ष पंडाल का निर्माण वृंदावन स्थित प्रसिद्ध प्रेम मंदिर की आकृति में किया गया है।
यहां भगवान श्री गणेशजी की महाआरती एवं पूजन में दादा गुरु शामिल होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उपस्थित रहने की संभावना है।
मां नर्मदा के प्रति समर्पित जीवन
दादा गुरु महान तपस्वी, संत स्वरूप एवं नर्मदा परिक्रमावासी के रूप में श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र हैं। उन्होंने मां नर्मदा की चार बार परिक्रमा कर आध्यात्मिक साधना एवं तपस्या का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी नर्मदा साधना और त्याग ने देशभर में श्रद्धालुओं को प्रभावित किया है।
दादा गुरु की तपस्या का सबसे विशेष पहलू उनका दीर्घकालीन उपवास है। बताया जाता है कि वे 2157 दिनों से उपवास पर हैं और इस दौरान केवल मां नर्मदा के जल का ही सेवन कर रहे हैं। उनकी कठोर साधना, संयम और नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा के कारण बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धा और आस्था के साथ नमन करते हैं।
दर्शन और महाआरती को लेकर तैयारियां
दादा गुरु के सेंधवा आगमन को लेकर धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं एवं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। उनके दर्शन, आशीर्वाद एवं महाआरती में सहभागिता को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर दादा गुरु के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।



