सेंधवा। तीन दशक से जीवन बचाने की मुहिम, रक्तसेवी श्याम पाटिल का पुलिस ने किया सम्मान
एक दर्दनाक घटना से शुरू हुआ मानवता का सफर

सेंधवा। भौतिकवाद और भागदौड़ भरे दौर में जहां समाज में संवेदनाएं कमजोर पड़ती नजर आती हैं, वहीं सेंधवा के रक्तसेवी श्याम पाटिल पिछले तीन दशकों से मानवता की सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। वर्ष 1993 में शहर के एक अस्पताल में रक्त के अभाव में दो वर्षीय बालिका की मौत ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था। इसी घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने जरूरतमंद मरीजों तक रक्त पहुंचाने का संकल्प ले लिया। तब से लेकर आज तक वे निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद में जुटे हुए हैं। उनके इसी समर्पण और रक्तदान सेवाओं को देखते हुए 14 जून 2026 को थाना प्रभारी दिनेश सिंह कुशवाह एवं पुलिस टीम ने उन्हें पुष्पमाला पहनाकर तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। तीन दशक से जारी उनकी यह सेवा मानवता के प्रति समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल मानी जा रही है।
एक संदेश पर रक्तदान के लिए तैयार हो जाते हैं लोग
सेंधवा नगर में रक्तदान को लेकर लोगों में विशेष जागरूकता और संवेदनशीलता देखने को मिलती है। हिंदू-मुस्लिम सहित सभी वर्गों के लोग दिन हो या रात, ठंड हो या बारिश, जरूरत पड़ने पर रक्तदान के लिए आगे आते हैं। श्याम पाटिल ने वर्षों की मेहनत से ऐसा नेटवर्क तैयार किया है कि एक संदेश पर रक्तदाता अस्पताल पहुंच जाते हैं। मोबाइल युग आने से पहले भी जब किसी अस्पताल में रक्त की आवश्यकता होती थी, तब लोगों की पहली उम्मीद श्याम पाटिल ही होते थे। आज भी वे जरूरतमंद परिवारों और रक्तदाताओं के बीच एक मजबूत कड़ी बने हुए हैं।
हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बने श्याम पाटिल
सेंधवा और पानसेमल विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों गांवों और लगभग 300 पंचायतों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए श्याम पाटिल एक भरोसेमंद नाम बन चुके हैं। क्षेत्र में प्रतिवर्ष हजारों यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है, जिसकी व्यवस्था में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहता है। अस्पतालों में परेशान और निराश परिजनों के बीच पहुंचकर रक्त की व्यवस्था कराना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।



