सेंधवा से दिल्ली तक गूंजेगी चुनावी पारदर्शिता की मांग, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक के लिए जंतर-मंतर पर जुटेंगे युवा
सरपंच अटल आर्य सहित सेंधवा के युवा दिल्ली रवाना, 10 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन में मतदाता अधिकारों और चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाएंगे

जनोदय पंच। सेंधवा से युवा 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आंदोलन में शामिल होंगे। आंदोलन में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे।
सेंधवा से आंदोलन में शामिल होने के लिए सरपंच अटल आर्य, मगन जमरे, अमर सोलंकी, प्रदेश महासचिव नीलेश आर्य, अमल बरड़े, अजय सोलंकी और प्रदीप वास्कले सहित अन्य युवा दिल्ली रवाना हुए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों ने इस आंदोलन का आह्वान किया है।
आंदोलन में उठेंगी चुनाव सुधार की मांगें:
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर रोक लगाने और उसकी निष्पक्ष समीक्षा की मांग की जाएगी। इसके अलावा मतदाता सूची में हुए बदलावों और नाम हटाए जाने से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई जाएगी।
आंदोलन का आह्वान करने वाले संगठन ने जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने, संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग की है। संगठन वर्ष 2023 के नियुक्ति कानून में बदलाव कर अधिक पारदर्शी और व्यापक भागीदारी वाली व्यवस्था बनाने के पक्ष में है। साथ ही मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े निर्णयों और प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड सार्वजनिक कर चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई है। मतदाता सूची में गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र जांच के जरिए किया जाना आवश्यक है।
मतदाता के अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद : मगन जमरे
सेंधवा से दिल्ली रवाना हुए मगन जमरे ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के मताधिकार का सम्मान होना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने पर उनका जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए, ताकि जनता का चुनाव व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर पात्र नागरिक को बिना किसी परेशानी के मतदान का अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है। मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटता है या हटाया जाता है, तो उसकी शिकायत का सरल, निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान होना चाहिए।”
जमरे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया की समीक्षा और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था में सुधार जैसी मांगों को आंदोलनकारी संगठन लोकतांत्रिक जवाबदेही से जोड़कर उठा रहे हैं। इन मुद्दों पर संबंधित संस्थाओं को तथ्यों के आधार पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी पर जोर:
मगन जमरे ने कहा कि देश के युवाओं की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी महत्वपूर्ण है। युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों के साथ-साथ अपने संवैधानिक अधिकारों तथा चुनाव प्रक्रिया के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम दिल्ली इसलिए जा रहे हैं, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े इन सवालों पर अपनी बात रख सकें। हमारी अपेक्षा है कि मतदाताओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।”
उन्होंने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
10 अक्टूबर के आंदोलन पर नजरें:
सेंधवा से युवाओं का दिल्ली रवाना होना चुनाव प्रक्रिया, मतदाता अधिकारों और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने की उनकी भागीदारी को दर्शाता है। अब 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन और उसमें उठाए जाने वाले मुद्दों पर नजरें रहेंगी।




