प्राध्यापक संघ के आव्हान पर कालेज प्रोफेसरों ने काली पट्टी बांधकर दर्ज कराया विरोध

बुधवार दिनांक 01/07/2026 से प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ (म प्र) के आव्हान पर वीर बलिदानी खाज्या नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेंधवा जिला बड़वानी के प्राध्यापकों ने अपनी कई वर्षों से लंबित जायज मांगों के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा निराकरण ना किये जाने पर हाथों पर काली पट्टी बांधकर शासन के प्रति सांकेतिक विरोध दर्ज कराया।
प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के बड़वानी जिलाध्यक्ष डॉ दिनेश कनाड़े ने बताया कि दिनांक 07/06/2026 को भोपाल में प्राध्यापक संघ की साधारण सभा की आयोजित बैठक में
प्राध्यापक संघ के संरक्षक प्रो कैलाश त्यागी एवं प्रांताध्यक्ष प्रो आनंद शर्मा की उपस्थिति में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि नवीन शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ होते ही उच्च शिक्षा विभाग मे कार्यरत शिक्षको, क्रीड़ा अधिकारियों एवं ग्रंथपालों द्वारा प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में दिनांक 01 से 15 जुलाई तक हाथों में काली पट्टी बांधकर काम किया जायेगा। हालांकि प्राध्यापक संघ ने यह स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन शासन के प्रति सांकेतिक विरोध है, इसमें किसी भी शैक्षणिक गतिविधि का बहिष्कार नहीं किया जायेगा और विद्यार्थियों की पढाई प्रभावित नही होने दी जायेगी। यह विरोध शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्राध्यापक संघ द्वारा शासन को बार-बार ज्ञापन सौंपने एवं चर्चा के बाद भी उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कई वर्षों से लंबित मांगों का निराकरण नहीं किया जा रहा है। कुछ मांगें तो पिछले 20 वर्षों से लंबित हैं। प्राध्यापकों में विभाग की निष्क्रियता एवं लचर प्रणाली के कारण गहरा रोष एवं असंतोष व्याप्त है, इसी कारण प्राध्यापक वर्ग आंदोलन की राह पर अग्रसर है।
ये हैं प्रमुख मांगें –
1. वर्ष 2004 एवं 2005 में नियुक्त बैकलॉग असिस्टेंट प्रोफेसरों की परिवीक्षा अवधि नियुक्ति दिनांक से 2 वर्ष में समाप्त कर उन्हें यूजीसी नियमानुसार कैरियर एडवांसमेंट (Career Advancement) का लाभ दिया जाये तथा जिन असिस्टेंट प्रोफेसरों ने अभी निर्धारित योग्यता अर्जित नहीं की है, उन्हें वर्ष 2028 तक योग्यता अर्जित करने का अवसर प्रदान किया जाये।
2. क्रीड़ा अधिकारियों एवं ग्रंथपालों को असिस्टेंट प्रोफेसर, ऐसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पदनाम दिया जाये तथा उनकी सेवानिवृति की आयु में वृद्धि कर 65 वर्ष की जाये। साथ ही यूजीसी प्रावधानानुसार पे-मैट्रिक्स 14 का लाभ दिया जाये।
3. वर्ष 2009, 2011 व 2019 में नियुक्त, नियमितीकरण से वंचित असिस्टेंट प्रोफेसरों की परिवीक्षा अवधि समाप्त की जाये एवं उन्हें कैरियर एडवांसमेंट का लाभ शीघ्र दिया जाये। छानबीन समिति की बैठक प्रति सप्ताह एवं विषयवार आयोजित की जाये।
4. असिस्टेंट प्रोफेसरों एवं एसोसिएट प्रोफेसरों को पात्रता अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर पदनाम दिया जाये।
5. सेवानिवृत्त शिक्षकों के पेंशन, वेतन निर्धारण, अर्जित अवकाश एवं समूह बीमा भुगतान को प्राथमिकता दी जाये।
6. सामान्य प्रशासन विभाग के नियमानुसार परामर्शदात्री समिति की बैठक शीघ्र आयोजित की जाये। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पिछले 10 वर्षों से परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित नहीं की गई है।
सांकेतिक विरोध में महाविद्यालय से ये रहे शामिल
प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के बड़वानी जिलाध्यक्ष डॉ दिनेश कनाड़े एवं तहसील ईकाई सेंधवा से अध्यक्ष डॉ एम एल अवाया, उपाध्यक्ष डॉ यशोदा चौहान, सचिव डॉ महेश बाविस्कर, सहसचिव डॉ संतोषी अलावा, सहसचिव डॉ जितेश्वर खरते, कोषाध्यक्ष डॉ किशोर सोलंकी, डॉ संतरा चौहान, डॉ विक्रम जाधव, प्रो मीतू मोतियानी, डॉ संगीता परमार, प्रो दीपक मरमट, डॉ अखलाक खान, प्रो जितेन्द्र सूर्यवंशी, प्रो राजेश नावड़े, प्रो सायसिंह अवास्या, प्रो परमसिंह बरडे, प्रो दिनेशचन्द्र भूरिया, प्रो संतोष पटेल, प्रो नितिन डावर, प्रो निलेश ठाकुर, प्रो भारतसिंह जामोद, प्रो रेखा पंवार सहित 30 प्रोफेसर शामिल रहे।



