सेंधवा में रश्मि जी महाराज साहब का संदेश, बोले- कान भरने वालों से रहें सावधान, परिवारों में लग जाती है आग
जैन स्थानक में प्रवचन के दौरान श्रीराम और गिलहरी का प्रसंग सुनाकर सद्भाव, संयम और विवेक का दिया संदेश

सेंधवा। ज्ञानगच्छाधिपति पूज्य प्रकाशचंदजी महाराज साहब की आज्ञानुवर्तनी रश्मि जी महाराज साहब ने जैन स्थानक में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोगों को स्वयं सुखी रहने से अधिक दूसरों के घर और जीवन में आग लगाने में आनंद आता है। ऐसे लोगों से जीवन में सदैव बचकर रहना चाहिए, क्योंकि वे अच्छे-भले, सुखी परिवारों में भी कलह उत्पन्न कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि द्रौपदी की जबान और दुर्योधन के कान ने महाभारत करा दिया था, इसलिए मनुष्य को अपनी वाणी और कान, दोनों पर सदैव नियंत्रण रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कान भरने वालों से हमेशा सावधान रहना चाहिए। पहले घरों में चूल्हे जलाने के लिए फूंकनी का उपयोग होता था, लेकिन आज भले ही उसकी आवश्यकता न हो, कुछ लोगों की दूसरों के कान में फूंक मारने की आदत आज भी नहीं गई है। ऐसे लोग परिवारों और रिश्तों में वैमनस्य पैदा कर देते हैं। उन्होंने कहा कि दीपक में फूंक मारने से केवल दीपक बुझता है, लेकिन यदि किसी के कान में फूंक मारी जाए तो पूरा जीवन उजड़ सकता है। इसलिए न तो ऐसा कार्य करें और न ही ऐसे लोगों के प्रभाव में आएं।
रश्मि जी महाराज साहब ने भगवान श्रीराम के गुणों का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम केवल मनुष्यों के ही नहीं, बल्कि देव, दानव और पशु-पक्षियों के लिए भी पूजनीय थे। उन्होंने लंका विजय से पूर्व का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब वानर सेना समुद्र पर पुल का निर्माण कर रही थी, तब एक गिलहरी भी गीली मिट्टी लाकर पत्थरों के बीच की खाली जगह भर रही थी। श्रीराम ने जब उससे ऐसा करने का कारण पूछा तो गिलहरी ने उत्तर दिया कि यदि इस कार्य में उसका जीवन भी चला जाए, तब भी इतिहास में उसका नाम श्रीराम के साथ जुड़ जाएगा, रावण के साथ नहीं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सद्कार्यों में अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए।
श्री संघ के अध्यक्ष तेजस शाह ने बताया कि जैन स्थानक में प्रतिदिन सुबह 9:00 से 10:00 बजे तक प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। धर्मसभा में लखनलाल मंगल, के.सी. पालीवाल, महेश मित्तल, श्याम गोयल, पवन अग्रवाल, नीरज गोयल, अशोक गोयल, पंकज अग्रवाल, प्रशांत गोयल, कुलदीप पाटीदार, सदाशिव मंडलोई, बी.एल. जैन, नंदलाल बुरड़, अशोक सकलेचा, दिलीप सुराणा, राजेन्द्र कांकरिया, महावीर सुराणा, परेश सेठिया, गौतम सुराणा सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में तपस्या के प्रत्याख्यान भी संपन्न हुए।



