बड़वानी में खेल मैदान पर हंगामा, खिलाड़ियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर उठाई बदहाली की आवाज
प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के छात्रों ने मैदान के जीर्णोद्धार, सुरक्षा और खेल सुविधाओं को लेकर सौंपा ज्ञापन।

रमन बोरखड़े। जनोदय पंच। बड़वानी के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के छात्र एवं खिलाड़ियों ने खेल मैदान की बदहाल स्थिति के विरोध में पैदल मार्च निकाला। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपते हुए मैदान के जीर्णोद्धार, मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
खेल मैदान की स्थिति को लेकर निकाला पैदल मार्च
बड़वानी। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के छात्र एवं खिलाड़ियों ने बुधवार को खेल मैदान की बदहाल स्थिति के विरोध में कॉलेज से कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान खिलाड़ियों ने डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपकर खेल मैदान के जीर्णोद्धार, आवश्यक सुविधाओं के विकास तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग रखी।

रखरखाव और खेल सुविधाओं को लेकर उठाए सवाल
ज्ञापन में छात्रों ने बताया कि बड़वानी का प्रमुख खेल मैदान लंबे समय से रखरखाव के अभाव और गैर-खेल गतिविधियों के कारण बदहाल स्थिति में है। खिलाड़ियों का कहना है कि इस संबंध में पहले भी प्रशासन को अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। खिलाड़ियों ने 400 मीटर रनिंग ट्रैक पर मार्किंग कराने, जलभराव की समस्या दूर करने के लिए नाली एवं पाइपलाइन निर्माण कराने तथा मैदान में निजी कार्यक्रमों और वाहन पार्किंग पर रोक लगाने की मांग की।

सुरक्षा और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग
खिलाड़ियों ने महिला एवं पुरुष खिलाड़ियों के लिए पृथक शौचालय और बाथरूम, खेल सामग्री रखने के लिए स्टोर रूम तथा मैदान के रखरखाव के लिए स्थायी कर्मचारी नियुक्त करने की मांग भी रखी। इसके अलावा मैदान में असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से बाउंड्री वॉल ऊंची करने, प्रवेश द्वारों सहित पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

प्रशासन ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए खिलाड़ियों को भरोसा दिलाया कि उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। अब खिलाड़ियों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा मैदान चाहिए जहां अगली पीढ़ी के खिलाड़ी बिना डर और बिना परेशानी के अपने सपनों को उड़ान दे सकें।



