बड़वानी में बड़ा मामला, कुशवाह समाज का प्रदर्शन; पदाधिकारियों पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने की उठाई मांग
समान गोत्र विवाह विवाद में दर्ज प्रकरण को निराधार बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग।

जनोदय पंच। बड़वानी में कुशवाह क्षत्रिय समाज ने अपने पदाधिकारियों पर दर्ज एफआईआर के विरोध में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज ने प्रकरण को निराधार बताते हुए एफआईआर निरस्त करने, निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने तथा संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की।
कुशवाह क्षत्रिय समाज ने बुधवार शाम कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ल को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में समाज ने राजपुर थाने में समाज के पदाधिकारियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को निराधार बताया। समाज ने एफआईआर निरस्त करने, पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने तथा संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की।
समान गोत्र विवाह विवाद का किया उल्लेख
समाज ने ज्ञापन में बताया कि मामला राजपुर निवासी महेंद्र लोणारे के परिवार से संबंधित है। समाज के अनुसार संबंधित युवक और युवती एक ही कुल एवं गोत्र के थे। हिंदू मान्यताओं और सामाजिक परंपराओं के अनुसार समान गोत्र में विवाह को स्वीकृति नहीं दी जाती, इसलिए समाज ने विवाह की लिखित अनुमति नहीं दी थी। समाज का कहना है कि दोनों पक्षों को इस संबंध में पहले ही अवगत करा दिया गया था, इसके बावजूद उन्होंने 1 मई 2026 को विवाह कर लिया।

सामाजिक बहिष्कार के आरोपों का किया खंडन
ज्ञापन में समाज ने कहा कि विवाह से पूर्व ही संबंधित परिवार ने स्वेच्छा से समाज की सदस्यता छोड़ दी थी। ऐसे में सामाजिक बहिष्कार अथवा निष्कासन का प्रश्न ही नहीं उठता। समाज का दावा है कि विवाह के दौरान या उसके बाद उनकी ओर से किसी प्रकार का विरोध अथवा अप्रिय घटना नहीं हुई।
एफआईआर और धाराओं पर जताई आपत्ति
समाज ने बताया कि पुलिस ने समाज के पांच लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(2) एवं 351(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। समाज ने इन धाराओं के तहत दर्ज कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि न तो किसी से फिरौती मांगी गई और न ही किसी को धमकाया गया। ज्ञापन में दर्ज एफआईआर की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराने, पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने, शिकायत असत्य पाए जाने पर एफआईआर निरस्त कर शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने तथा बिना जांच एफआईआर दर्ज करने वाले थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने की मांग की गई।



