सेंधवा में शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, गुरु संदेश और सम्मान समारोह रहा आकर्षण
परम पूज्य गोपेश्वरदेव जी महाराज ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक संदेश दिए।

जनोदय पंच। सेंधवा में आयोजित दिव्य श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने परम पूज्य गोपेश्वरदेव जी महाराज के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया गया तथा देवेश्वरी गोशाला, सिख समाज एवं होमियोपैथी कॉलेज के चिकित्सकों द्वारा गुरुदेव का सम्मान भी किया गया।
पांचवें दिवस कथा में उमड़े श्रद्धालु
सेंधवा। दिव्य श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिवस बुधवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परम पूज्य गोपेश्वरदेव जी महाराज के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान उन्होंने विभिन्न धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और पूजा-विधि से जुड़े संदेश दिए। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और कथा का क्रम विधिवत संचालित हुआ।

धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से दिया संदेश
कथा के दौरान गोपेश्वरदेव जी महाराज ने पुष्पदंत का प्रसंग सुनाते हुए भगवान शिव की उपासना से जुड़े धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महादेव पर अर्पित किए गए पुष्प को कभी नहीं लांघना चाहिए तथा महादेव की जलेहरी का भी उल्लंघन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से समस्त तप और पुण्य नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कीर्तिमुख का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान महादेव के मंदिर में दर्शन के समय कीर्तिमुख का स्मरण अवश्य करना चाहिए, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। कथा में शंखचूर्ण के चरित्र का भी वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रसंग का श्रवण करने से जीवन के सभी उपद्रव समाप्त हो जाते हैं।

गुरुदेव का हुआ सम्मान
कथा के दौरान देवेश्वरी गोशाला के पंख चेतन एवं उनके साथियों तथा सिख समाज एवं होमियोपैथी कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा परम पूज्य गोपेश्वरदेव जी महाराज का सम्मान किया गया। इस अवसर पर गुरुदेव ने सिख समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रत्येक सनातनी उनके प्रति ऋणी रहेगा।



