सेंधवा

सेंधवा में मकर संक्रांति पर सौभाग्य और संस्कृति का संगम, मातृशक्ति मंडल का आयोजन

जनोदय पंच। सेंधवा। सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक मकर संक्रांति है। हल्दी कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक है। जिससे सौभाग्य में वृद्धि होती है ।सेंधवा में मातृशक्ति महिला मंडल के द्वारा मकर संक्रांति उत्सव पर हल्दी कुमकुम का कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिलाओं ने एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए सदा सुहागन रहने की कामना की। एक दूसरे को हल्दी, कुमकुम लगाकर साड़ी, सुहाग की सामग्री, एवं उपहार बांटे गए।

इस दौरान मंडल की अंतिम बाला शर्मा ने बताया कि इस दिन सूर्य देव की पूजा होती है ।जब भगवान सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने एवं दान पुण्य करने का करने का विशेष महत्व बताया गया है । तील्ली को मुट्ठी में लेते हैं, तो वह फिसल जाती है ।लेकिन जब उसे गुड़ के साथ मिला दिया जाता है तो वह मिठास के साथ मजबूत हो जाती है। ऐसी ही मिठास की मजबूती हर समाज में होनी चाहिए।
खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा है ।इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनिदेव से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। क्योंकि शनि देव मकर राशि के स्वामी है। अतः इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से इसलिए जाना जाता है। मकर संक्रांति के दिन गंगा जी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थी ।इसी वजह से मकर संक्रांति के दिन स्नान करना शुभ माना जाता है।

इस दिन खिचड़ी खाने का भी बहुत महत्व बताया गया है, क्योंकि खिचड़ी की गर्मी व्यक्ति को मंगल और सूर्य से जोड़ती है ।इस प्रकार खिचड़ी खाने से सभी प्रमुख ग्रह मजबूत हो जाते हैं ।ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से पूरे साल भर शरीर आरोग्य रहता है। मकर संक्रांति का महत्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक भी है। मकर संक्रांति को नई ऊर्जा, नई फसल और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व सूर्य देवता को समर्पित है। इस दिन को विज्ञान, अध्यात्म और कृषि से संबंधित कई पहलुओं के लिए मनाया जाता है ।मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, इसीलिए दान करने का महत्व बताया गया है। पतंग उड़ाने की परंपरा भी है। मंडल के द्वारा विभिन्न गतिविधियां रखी गई।
मंडल की गीता कानूनगों, रेखा मंडलोई, कृष्णा शर्मा, राखी आगाल,वर्षा कानूनगो, लक्ष्मी शर्मा ,रेनू भार्गव, अर्चना गुले ,एवं मंडल के सभी सदस्य उपस्थित थे।

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