सेंधवा/बड़वानी: मन्नत के मेले ‘बारगुनिया मेलादा’ में उमड़ा आस्था का सैलाब: अंगारों पर चलकर पूरी की मन्नतें

सेंधवा/बड़वानी: आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक ‘बारगुनिया मेलादा’ हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। मध्य प्रदेश के इस अंतिम और ऐतिहासिक मेले में आस्था का वह स्वरूप देखने को मिला, जहाँ मन्नतधारी नंगे पैर दहकते अंगारों (चूल) पर चलकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरे संयम के साथ नियमों का पालन करते हैं, वे चूल चलकर अपनी मन्नत पूरी करते हैं।
इस अवसर पर बारगुनिया में सिरपुर, तोरणमाल, खंडवा और खरगोन सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से आदिवासी समाज के युवा, युवतियां और बुजुर्ग भारी संख्या में सम्मिलित हुए। मेले में 1.5 लाख से अधिक जनसैलाब उमड़ा, जिससे पूरा क्षेत्र आदिवासी लोक संस्कृति के रंग में रंग गया।

राहुल सोलंकी के नेतृत्व में गूंजे ढोल-मांदल
मेले के मुख्य आकर्षण में मध्य प्रदेश विकास परिषद के युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष राहुल सोलंकी अपनी टीम के साथ विशेष रूप से शामिल हुए। राहुल सोलंकी ने आदिवासी सांस्कृतिक वाद्य यंत्र ढोल और मांदल की थाप पर समाज के युवाओं के साथ नृत्य कर उत्साह बढ़ाया। इस दौरान 51 ढोल-मांदल की गूंज ने मेले के वातावरण को और भी भव्य बना दिया।

समाज के बीच बांटी खुशियां
जिला अध्यक्ष राहुल सोलंकी ने मेले में उपस्थित समाजजनों से आत्मीय मुलाकात की और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर खुशियां बांटी। उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों को मेलादे की बधाई देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं, जिन्हें सहेजना हम सभी का कर्तव्य है।
मेले में आदिवासी वेशभूषा, पारंपरिक आभूषण और सांस्कृतिक वाद्य यंत्रों के साथ समाज की एकता और अखंडता का अनूठा संगम देखने को मिला।




