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सेंधवा; रामकोला में पहली बार मुंडिया बाबा की भव्य जतरा, उमड़ा जनसैलाब, 100 से अधिक ढोल दलों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, विधायक भी हुए शामिल

 धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के संगम में ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

सेंधवा क्षेत्र के ग्राम रामकोला में पहली बार मुंडिया बाबा की भव्य जतरा आयोजित हुई, जिसमें 100 से अधिक ढोल दलों ने भाग लिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरे दिन धार्मिक व सांस्कृतिक माहौल बना रहा। विधायक मोंटू सोलंकी भी शामिल हुए।


सेंधवा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रामकोला में रविवार को पहली बार मुंडिया बाबा की भव्य जतरा (मेला) का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह से सराबोर कर दिया। आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे, जिससे पूरे दिन मेले का वातावरण जीवंत बना रहा।

जतरा का मुख्य आकर्षण 100 से अधिक ढोल दलों की भागीदारी रही। इन दलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ अपनी प्रस्तुति दी, जिसने ग्रामीणों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल की गूंज और पारंपरिक धुनों के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए। आयोजन समिति द्वारा सभी ढोल दलों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार प्रदान किए गए, जिससे प्रतिभागियों में उत्साह और बढ़ा।

कार्यक्रम में सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने मुंडिया बाबा मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने आयोजन समिति और ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार आयोजित इस जतरा में अपेक्षा से अधिक जनसहभागिता देखने को मिली है।

विधायक ने कहा कि मुंडिया बाबा क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र हैं, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ आते हैं और उन्हें पूर्ण होने का विश्वास रखते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में इस जतरा को और अधिक भव्य स्वरूप दिया जाएगा।

आयोजन को लेकर उन्होंने कहा कि अगले वर्ष भी इसी तिथि पर जतरा आयोजित की जाएगी और इसके लिए अभी से व्यापक तैयारियां की जाएंगी। उद्देश्य यह है कि आयोजन को इस वर्ष की तुलना में चार गुना बड़े स्तर पर संपन्न किया जाए, ताकि यह क्षेत्र की पहचान बन सके।

पूरे आयोजन के दौरान ग्रामीणों में उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने रामकोला की इस पहली जतरा को यादगार बना दिया।

 

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