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वरला के केरमला में आयोजित रात्रि चौपाल में कलेक्टर बोली- जब तक तरीका नहीं बदलेंगे, तब तक परिवर्तन नहीं होगा

कलेक्टर और कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए उन्नत कृषि और प्राकृतिक खेती के गुर

बड़वानी; ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत जिले के किसानों को आधुनिक, उन्नत और स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा विभिन्न ग्राम पंचायतों में ‘रात्रि चौपाल’ का नियमित आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को वरला तहसील के ग्राम केरमला में कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह के मार्गदर्शन में रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। चौपाल में कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह,एसडीएम सेंधवा,संयुक्त कलेक्टर,कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वरिष्ठ वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय कृषकों ने सहभागिता की।

चौपाल को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने किसानों को पारंपरिक पद्धति को छोड़ आधुनिक पद्धति अपनाने की सलाह दी।। उन्होंने सीधे संवाद करते हुए कहा कि “खेती को लाभ का जरिया बनाने के लिए हमें अपनी सोच और तकनीक में बदलाव करना होगा। जब तक हम खेती का तरीका नहीं बदलेंगे, तब तक हमारे जीवन और आय में परिवर्तन नहीं आ सकता।”

प्रमुख बिंदुओं पर दी गई जानकारी:

1.एचडीपीएस तकनीक- कृषि वैज्ञानिकों द्वारा कपास व अन्य फसलों के लिए ‘हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम’ की विस्तृत जानकारी दी गई। इस तकनीक से कम रकबे में पौधों की संख्या बढ़ाकर उत्पादन को दोगुना किया जा सकता है। इस दौरान कलेक्टर ने किसानों से इस पद्धति को अपनाने हेतु जोर दिया।
2.जैविक एवं प्राकृतिक खेती: रसायन मुक्त खेती पर जोर देते हुए किसानों को भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और कम लागत में बेहतर फसल लेने के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने हेतु प्रेरित किया।
3.उन्नत बीज एवं प्रमाणीकरण: कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अच्छी पैदावार की नींव उन्नत और प्रमाणित बीजों से ही संभव है। किसानों को बीज प्रमाणीकरण के बारे में समझाया गया।
4.पीएम मिशन फॉर प्राकृतिक खेती (पीएम-एमएनएफ): ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ के अंतर्गत किसानों को अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई। इसके तहत पोर्टल पर पंजीयन कराने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया ताकि किसान सीधे तौर पर शासकीय योजनाओं और अनुदान का लाभ ले सकें।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी कृषकों को कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा तैयार किए गए मार्गदर्शिका पैम्फलेट वितरित किए गए। इन पैम्फलेट्स में जैविक खाद बनाने की विधि, एचडीपीएस तकनीक के दिशा-निर्देश और सरकारी योजनाओं की पात्रता की जानकारी दी गई है, ताकि किसान चौपाल के बाद भी इसका अभ्यास कर सकें। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और प्रशासन की इस पहल की सराहना की, जिससे उन्हें घर बैठे ही मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

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