बड़वानी में भारतीय शिक्षा दिवस एवं स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित, भारतीय शिक्षा परंपरा और जीवन मूल्यों पर हुआ मंथन
शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजन

जनोदय पंच। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, मालवा प्रांत एवं शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय शिक्षा दिवस एवं स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा, संस्कृति, ज्ञान परंपरा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
बड़वानी स्थित शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय शिक्षा दिवस एवं स्थापना दिवस कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, मालवा प्रांत एवं महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् गीत के साथ हुआ। इसके बाद अतिथियों ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर सरस्वती पूजन किया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर मुख्य वक्ता ने रखे विचार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, मालवा प्रांत के प्रांत विषय संयोजक एवं आदर्श महाविद्यालय, बड़वानी के सहायक प्राध्यापक (इतिहास) डॉ. अनिल पाटीदार ने कहा कि भारत प्राचीन काल से विश्व का ज्ञान केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि मैक्स मूलर सहित अनेक विदेशी विद्वानों ने नालंदा जैसे भारतीय विश्वविद्यालयों के ज्ञान का अध्ययन कर अपने देशों की शिक्षा व्यवस्था को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में भारतीय शिक्षा व्यवस्था की कुछ त्रुटियों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर अंग्रेजी शिक्षा पद्धति को श्रेष्ठ सिद्ध करने का प्रयास किया गया। उन्होंने भारतीय शिक्षा, संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारतीय शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर दिए गए उद्बोधन
विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. वीणा सत्य ने कहा कि भारतीय शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी.के. वर्मा ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय का माध्यम है तथा विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनना चाहिए।

प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन डॉ. जयराम बघेल ने किया। इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत पर्यावरण सह-संयोजक डॉ. भूपेन्द्र भार्गव विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. एम.एस. मोरे, डॉ. दिनेश परमार, डॉ. डेविड स्वामी, डॉ. नरगावे, प्रो. एम.एस. मंडलोई तथा न्यास सदस्य प्रो. दीपक केवट, रितेश दसौंदी एवं रजत उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। अंत में प्रो. जयकिशन नेनानी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्राध्यापकगण, विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।




