सेंधवा महाविद्यालय में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत परिचर्चा, विद्यार्थियों को जल संरक्षण का संदेश
विशेषज्ञों ने जल संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर किया मार्गदर्शन

सेंधवा। वीर बलिदानी खाज्या नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेंधवा में बुधवार को जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम-2026 के जागरूकता अभियान के अंतर्गत परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन नोडल अधिकारी प्रो. संतोष पटेल ने किया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार जल संरक्षण एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर
परिचर्चा को संबोधित करते हुए डॉ. राहुल सूर्यवंशी ने कहा कि पंच तत्वों से बने मानव शरीर में सबसे अधिक मात्रा जल की है तथा पृथ्वी का लगभग 70 प्रतिशत भाग जल से आच्छादित है। उन्होंने विद्यार्थियों से जल के महत्व को समझने और उसे जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति केवल संसाधनों का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सुखद बनाने का आधार भी है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करनी चाहिए।

भूजल संरक्षण और जनजागरूकता की अपील
प्रो. जितेन्द्र सूर्यवंशी ने कहा कि “जल ही जीवन है” केवल एक नारा नहीं, बल्कि वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने घटते भूजल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने और समाज में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। वहीं प्रो. शुभम वर्मा ने वर्षाकाल को प्रकृति का अनुपम उपहार बताते हुए जल के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। प्रो. रानू पाटीदार ने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को जल संवर्धन के विभिन्न उपायों की जानकारी देते हुए परिवार और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रो. नितिन डावर, प्रो. भारतसिंह जामोद, प्रो. रेखा पंवार, प्रो. सुरज वास्केल, प्रो. कीर्ति कापूरे सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी डॉ. विकास पंडित ने दी।




