प्राध्यापक पद पर पदोन्नति होने पर प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बी.एस. मुझाल्दा का हुआ आत्मीय स्वागत-अभिनंदन
शासकीय आदर्श महाविद्यालय में आयोजित समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध संस्कृति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया गया विशेष जोर

जनोदय पंच। शासकीय आदर्श महाविद्यालय, बड़वानी में प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बी.एस. मुझाल्दा के प्राध्यापक पद पर पदोन्नत होने के उपलक्ष्य में महाविद्यालय परिवार द्वारा गरिमामय स्वागत एवं अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर विज्ञान, कला एवं वाणिज्य संकाय के सहायक प्राध्यापकों ने दोनों वरिष्ठ शिक्षाविदों का पुष्पहार एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया तथा उनके शैक्षणिक योगदान की सराहना की।
पदोन्नति पर हुआ सम्मान समारोह
समारोह का वातावरण आत्मीयता, सम्मान और प्रेरणा से परिपूर्ण रहा। उपस्थित प्राध्यापकों ने कहा कि यह पदोन्नति केवल दो शिक्षकों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे महाविद्यालय परिवार के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने इसे वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुशासन तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति समर्पण का सम्मान बताया।

प्राचार्य ने शिक्षक की जिम्मेदारी पर रखे विचार
अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने कहा कि किसी भी शिक्षक की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके कार्य, ईमानदारी और विद्यार्थियों के जीवन में किए गए सकारात्मक योगदान से होती है। उन्होंने शिक्षा को व्यक्तित्व निर्माण की सतत प्रक्रिया बताते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षक का दायित्व विद्यार्थियों में अध्ययन, अनुसंधान, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रभावना का विकास करना है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

डॉ. मुझाल्दा ने शोध और नवाचार को बताया आवश्यक
वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बी.एस. मुझाल्दा ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सफलता के लिए ईमानदारी, निरंतर परिश्रम, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक हैं। उन्होंने युवा शिक्षकों से केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर शोध, लेखन, नवाचार, अकादमिक गतिविधियों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने में शिक्षक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
शोध संस्कृति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर हुई चर्चा
समारोह में उपस्थित सहायक प्राध्यापकों ने दोनों वरिष्ठ शिक्षकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और अनुभव से महाविद्यालय को निरंतर नई दिशा मिली है। कार्यक्रम के दौरान शोध संस्कृति को सुदृढ़ बनाने, विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा, नवाचार एवं रोजगारोन्मुख गतिविधियों के लिए प्रेरित करने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण को और प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने अध्ययनशील, शोधोन्मुख और विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।
संचालन एवं आभार के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल पाटीदार ने किया। उन्होंने स्वागत उद्बोधन में दोनों वरिष्ठ शिक्षकों के शैक्षणिक योगदान, कार्यनिष्ठा और विद्यार्थियों के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण का उल्लेख किया। अंत में डॉ. दिनेश पाटीदार ने आभार व्यक्त करते हुए सभी प्राध्यापकों एवं उपस्थितजनों का धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ तथा उपस्थित शिक्षकों ने दोनों पदोन्नत शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए महाविद्यालय की निरंतर प्रगति और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



