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सेंधवा में प्राध्यापक संघ का बड़ा कदम, वर्षों से लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा

लंबित मांगों के निराकरण को लेकर शिक्षकों, क्रीड़ा अधिकारियों और ग्रंथपालों ने रखी कई प्रमुख प्रशासनिक मांगें

जनोदय पंच। सेंधवा प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा विभाग में वर्षों से लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा, जिसमें शिक्षकों, क्रीड़ा अधिकारियों और ग्रंथपालों की समस्याओं के निराकरण की मांग की गई।

सेंधवा। सोमवार को प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ (म प्र) की ओर से बड़वानी जिले के प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों, क्रीड़ा अधिकारियों एवं ग्रंथपालों की कई वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार, नई दिल्ली के अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि शासन स्तर पर बार-बार ज्ञापन और चर्चा के बावजूद कई मांगों का समाधान नहीं हुआ है तथा कुछ मांगें पिछले 20 वर्षों से लंबित हैं।


प्रमुख एवं लंबित मांगें

प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत प्रमुख मांगों में वर्ष 2004 एवं 2005 में नियुक्त बैकलॉग असिस्टेंट प्रोफेसरों की परिवीक्षा अवधि नियुक्ति दिनांक से 2 वर्ष में समाप्त करने तथा यूजीसी नियमानुसार कैरियर एडवांसमेंट का लाभ प्रदान करने की मांग शामिल है। जिन असिस्टेंट प्रोफेसरों ने अभी निर्धारित योग्यता अर्जित नहीं की है, उन्हें वर्ष 2028 तक योग्यता प्राप्त करने का अवसर देने की बात भी रखी गई।

इसके साथ ही क्रीड़ा अधिकारियों एवं ग्रंथपालों को असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर पदनाम देने, उनकी सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने तथा यूजीसी प्रावधान अनुसार पे-मैट्रिक्स 14 का लाभ प्रदान करने की मांग की गई। वर्ष 2009, 2011 एवं 2019 में नियुक्त तथा नियमितीकरण से वंचित असिस्टेंट प्रोफेसरों की परिवीक्षा अवधि समाप्त कर कैरियर एडवांसमेंट लाभ शीघ्र देने की मांग भी शामिल रही।


प्रशासनिक सुधार एवं समिति संबंधी मांगें

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसरों एवं एसोसिएट प्रोफेसरों को पात्रता अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर पदनाम दिया जाए। सेवानिवृत्त शिक्षकों के पेंशन, वेतन निर्धारण, अर्जित अवकाश तथा समूह बीमा भुगतान को प्राथमिकता से निपटाने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के नियमानुसार परामर्शदात्री समिति की बैठक शीघ्र आयोजित करने तथा उच्च शिक्षा विभाग में पिछले 10 वर्षों से लंबित बैठक को तत्काल शुरू करने की बात कही गई।


आयोग अध्यक्ष से अनुरोध

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य से अनुरोध किया कि वे इन सभी लंबित मांगों को माननीय मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री के समक्ष प्रस्तुत कर शीघ्र निराकरण की दिशा में पहल करें, जिससे शिक्षकों और संबंधित संवर्गों की समस्याओं का समाधान हो सके।


प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति

इस अवसर पर प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के बड़वानी जिलाध्यक्ष डॉ दिनेश कनाड़े, तहसील इकाई सेंधवा के अध्यक्ष डॉ एम एल अवाया, उपाध्यक्ष डॉ यशोदा चौहान, सचिव डॉ महेश बाविस्कर, सहसचिव डॉ संतोषी अलावा, सहसचिव डॉ जितेश्वर खरते एवं कोषाध्यक्ष डॉ किशोर सोलंकी उपस्थित रहे।

साथ ही शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेंधवा से डॉ संतरा चौहान, डॉ संगीता परमार, प्रो दीपक मरमट, प्रो निलेश ठाकुर, प्रो संतोष पटेल, प्रो बलराम डुडवे, प्रो भारतसिंह जामोद, डॉ रेखा पंवार एवं प्रो सूरज वास्केल भी मौजूद रहे।


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