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मूंग खरीदी के समय को लेकर उठी किसानों की समस्या, सामाजिक कार्यकर्ता कासट ने पीएम और कृषि मंत्री को भेजा पत्र

सेंधवा। मध्यप्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी शासन द्वारा जुलाई माह में प्रस्तावित किए जाने को लेकर किसानों की समस्या सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश कासट ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को मेल भेजकर स्थिति से अवगत कराया है।

ज्ञापन में बताया गया है कि प्रदेश में मूंग की बुवाई सामान्यतः फरवरी–मार्च में की जाती है और यह लगभग 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके बाद फसल अप्रैल के दूसरे सप्ताह से बाजार में आने लगती है, जबकि अधिकतर किसान अप्रैल और मई में ही अपनी उपज बेच देते हैं। देरी से बुवाई करने वाले किसान जून के पहले सप्ताह तक मूंग का विक्रय कर देते हैं।

ऐसे में जुलाई माह में शासन द्वारा खरीदी किए जाने पर यह प्रश्न उठता है कि उस समय किसान अपना मूंग कहाँ से लाएंगे, क्योंकि अधिकांश उपज पहले ही बाजार में बिक चुकी होती है। साथ ही लंबे समय तक फसल घर में रखने पर उसके सड़ने और गुणवत्ता खराब होने की आशंका भी रहती है।

कासट ने अपने पत्र में कहा है कि यदि खरीदी सही समय पर की जाए तो किसानों को उचित लाभ मिलेगा और प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। उन्होंने अपील की है कि खरीदी प्रक्रिया को फसल आने के वास्तविक समय के अनुसार तय किया जाए।

यह मेल प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन, मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन तथा कलेक्टर बड़वानी को प्रेषित किया गया है। प्रार्थी के रूप में कैलाश कासट, बलवाड़ी (तहसील सेंधवा), जिला बड़वानी द्वारा यह मांग रखी गई है।

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