बड़वानी आदर्श महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य और छात्र कल्याण पर प्रशिक्षण, फैकल्टी को दिए गए व्यवहारिक मार्गदर्शन
प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने कहा, प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को प्रभावी मार्गदर्शन और सहयोग देने में मिलेगी सहायता।

बड़वानी। जनोदय पंच। शासकीय आदर्श महाविद्यालय, बड़वानी में आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार 6 जुलाई को ऑनलाइन मोड के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में भोपाल से विषय विशेषज्ञों ने फैकल्टी सदस्यों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और छात्र कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया। प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने कहा कि इस प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित और मार्गदर्शित करने में सहायता मिलेगी।
व्यक्तित्व विकार और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा
प्रशिक्षण कार्यक्रम की व्यवस्था डॉ. दिनेश पाटीदार और डॉ. लखन परमार ने की। सभागार में बड़ी स्क्रीन के माध्यम से भोपाल से प्रसारित प्रशिक्षण का सीधा प्रसारण फैकल्टी सदस्यों को दिखाया गया। प्रशिक्षण में व्यक्तित्व विकारों के लिए मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि विद्यार्थियों से संवाद और अध्ययन-अध्यापन के दौरान उन्हें सक्रिय रूप से सुनना चाहिए तथा जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। तर्कहीन व्यवहार को समझना और उच्च जोखिम के संकेतों की समय रहते पहचान करना आवश्यक है।

जोखिम के संकेतों की पहचान पर जोर
प्रशिक्षण में बताया गया कि आत्महत्या के विचार, नशे की लत, तीव्र चिंता, स्वयं को संकट में महसूस करना, सामाजिक अलगाव, लापरवाहीपूर्ण व्यवहार, घबराहट तथा व्यवहार में अचानक परिवर्तन मानसिक समस्याओं के प्रमुख संकेत हो सकते हैं। व्यक्तित्व विकारों में अनुभूति, पारिस्थितिक कार्य प्रणाली, भावनात्मक संतुलन और आवेग नियंत्रण के माध्यम से सुधार संभव है। सुरक्षित संवाद के लिए कम बोलना और अधिक सुनना, जरूरतों की पहचान करना, सहयोग स्थापित करना तथा सुरक्षा और शांति को प्राथमिकता देना आवश्यक बताया गया। बातचीत के लिए ऐसा स्थान चुनने की सलाह दी गई, जहां किसी प्रकार का बाहरी व्यवधान न हो।
विद्यार्थियों तक पहुंचाने का उद्देश्य
विशेषज्ञों ने बताया कि मादक द्रव्यों के सेवन और व्यसन की समय पर पहचान कर विद्यार्थियों को मानसिक विकारों की स्थिति में जाने से रोका जा सकता है। इसके लक्षणों में व्यवहार में बदलाव, शराब या अन्य नशीले पदार्थों का प्रभाव, अनिद्रा, अत्यधिक बोलना, चक्कर आना, बेचैनी तथा अस्पष्ट बोलना शामिल हैं। फैकल्टी सदस्यों को प्रतिदिन की कक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों पर अभिभावक की तरह सतत दृष्टि रखने तथा उनके साथ संवाद और पारस्परिक सहयोग का वातावरण विकसित करने की सलाह दी गई। बताया गया कि इससे आत्महत्या की प्रवृत्ति और मनोविकारों में कमी लाने में सहायता मिलेगी। उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से आयोजित इस प्रशिक्षण में महाविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से यह जानकारी विद्यार्थियों तक प्रभावी रूप से पहुंचाना है।



