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सेंधवा; पीपलधार से पुराने एबी रोड तक 1.50 किलोमीटर जर्जर मार्ग पर दुर्घटना का खतरा, क्षतिग्रस्त मार्ग के स्थायी मरम्मत और मजबूतीकरण की मुख्यमंत्री सहित संबंधित विभागों मांग  

सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन ने मुख्यमंत्री सहित अधिकारियों को भेजा ज्ञापन।

सेंधवा | जनोदय पंच।  राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-3 से पीपलधार होते हुए पुराने ए.बी. रोड तक लगभग 1.50 किलोमीटर का हिस्सा काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसके कारण आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी हुई है। इस मार्ग के मरम्मत कार्य एवं स्थायी मजबूतीकरण की मांग प्रदेश शासन से की गई है।

मुख्यमंत्री सहित अधिकारियों को भेजा पत्र

सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन ने इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, लोक निर्माण मंत्री, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग तथा कलेक्टर बड़वानी को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि सेंधवा शहर के मध्य से पहले मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-3 गुजरता था। इंदौर-बिजासन के बीच फोरलेन मार्ग बनने के बाद वर्ष 2011 से सेंधवा शहर के बाहर बायपास मार्ग का निर्माण किया गया। इसके बाद शहर से गुजरने वाला पुराना मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग के अधीन आ गया।

कई स्थानों पर सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त

नगर पालिका सेंधवा की निधि एवं राज्य शासन के सहयोग से निजी रेस्टोरेंट से इंदिरा कॉलोनी तक सीमेंट-कंक्रीट का फोरलेन मार्ग डिवाइडर सहित बनाया जा चुका है। इसके बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग से शहर को जोड़ने वाले पीपलधार से मैकेनिक नगर होते हुए गौशाला तक लगभग 1.50 किलोमीटर मार्ग कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। इससे वाहन चालकों और यात्रियों को आवागमन में काफी असुविधा हो रही है। महावीर कॉलोनी से पीपलधार के बीच अस्पताल, मैकेनिक नगर, स्कूल तथा बिजासन माता मंदिर होने के कारण इस मार्ग पर यातायात का दबाव भी अधिक रहता है।

स्थायी समाधान और नाली निर्माण की मांग

बी.एल. जैन ने पत्र में बताया कि इस सड़क का निर्माण लगभग साढ़े चार वर्ष पूर्व हुआ था, लेकिन बार-बार इसका हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है। शिकायतों के बाद केवल अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है। स्थायी मजबूतीकरण नहीं होने से आम लोगों को इस जोखिम भरे मार्ग से आवागमन करना पड़ रहा है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि क्षतिग्रस्त हिस्से का व्यवस्थित मरम्मत कार्य कर स्थायी मजबूतीकरण कराया जाए। साथ ही, सड़क के दोनों ओर जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण भी किया जाए, ताकि पानी भराव के कारण सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त न हो। पत्र में इस कार्य की शीघ्र स्वीकृति की भी मांग की गई है।

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