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सेंधवा के प्रोफेसर जितेंद्र सूर्यवंशी ने बनाई खगोलीय अध्ययन पर आधारित वेबसाइट, जीवाजी वेधशाला की कार्यप्रणाली को किया डिजिटल

सेंधवा के प्रोफेसर जितेंद्र सूर्यवंशी ने बनाई खगोलीय अध्ययन पर आधारित वेबसाइट, जीवाजी वेधशाला की कार्यप्रणाली को किया डिजिटल

सेंधवा। वीर बलिदानी ख्वाजा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेंधवा के प्रोफेसर जितेंद्र सूर्यवंशी ने rudravedh.in नामक एक शैक्षणिक वेबसाइट विकसित की है, जो उज्जैन स्थित जीवाजी वेधशाला को समर्पित है। “सूर्यमान-अवंतिका” शीर्षक से तैयार इस वेबसाइट का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को वेधशाला में स्थापित खगोलीय यंत्रों की कार्यप्रणाली तथा भारतीय खगोलशास्त्र के सिद्धांतों से परिचित कराना है।

प्रो. सूर्यवंशी ने बताया कि वेबसाइट में जीवाजी वेधशाला में स्थापित पांच प्रमुख खगोलीय यंत्रों—नाड़ी वलय यंत्र, दिगंश यंत्र, शंकु यंत्र, सम्राट यंत्र तथा भित्ति यंत्र—की कार्यप्रणाली, उनके सिद्धांत और विभिन्न स्थानों के अनुसार उनके उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई है। वेबसाइट में यह भी बताया गया है कि इन यंत्रों की सहायता से स्थानीय सौर समय, घंटे का कोण, क्रांतांश, दिगंश, उन्नतांश, सूर्य की सायन राशि तथा नतांश जैसी खगोलीय गणनाओं को कैसे समझा और उपयोग किया जा सकता है।

वेबसाइट को अधिक उपयोगी एवं सहज बनाने के लिए विभिन्न नामांकित आरेख, त्रिआयामी (3D) चित्र, इंटरैक्टिव सिमुलेशन तथा अन्य उन्नत तकनीकी संसाधनों का विकास स्वयं प्रो. सूर्यवंशी द्वारा किया गया है। वेबसाइट में प्रस्तुत सामग्री प्राचीन एवं प्रामाणिक ग्रंथों पर आधारित है, जिनका उल्लेख भी वेबसाइट पर किया गया है।

डॉ. विकास पंडित ने बताया कि जुलाई माह में जारी की गई इस वेबसाइट को अब तक 5,000 से अधिक बार देखा जा चुका है तथा इसके लगभग 400 सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। वेबसाइट का उपयोग भारत के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस सहित अन्य देशों के उपयोगकर्ताओं द्वारा भी किया जा रहा है।

प्रो. सूर्यवंशी ने बताया कि इसके अतिरिक्त उन्होंने osimulations.in नामक एक अन्य शैक्षणिक वेबसाइट भी विकसित की है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी ज्यामिति के उपकरणों के इंटरैक्टिव सिमुलेशन का उपयोग कर विभिन्न रचनाओं का अभ्यास कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में विभिन्न विषयों के प्रायोगिक कार्यों के लिए एक वर्चुअल प्रैक्टिकल वेबसाइट विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

 

 

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